Saturday, July 11, 2020

बड़ा झटका: 2020 में नहीं आ पाएगी कोरोना वैक्सीन, क्या है सच?

दुनिया ने इससे पहले ऐसी महामारी कभी नहीं देखी, लिहाजा लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे हालात में वो क्या करें। इतना ही नहीं आशंका है कि अभी हालात और भी बिगड़ सकते हैं। दुनिया के देशों के लिए सबसे चिंता की बात ये है कि अबतक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कोई वैक्सीन या फिर नहीं दवाई खोजी जा सकी है।

पल्लवी झा, नई दिल्ली: चीन के वुहान से चले वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) संक्रमण से दुनियाभर के करीब 200 देशों में हाहाकार मचा है और यह लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। दुनियाभर में 53.10 लाख से ज्यादा लोगों कोरोना के जानलेवा विषाणु की चपेट में आ चुके हैं जबकि अब तक 3.42 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

दुनिया ने इससे पहले ऐसी महामारी कभी नहीं देखी, लिहाजा लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे हालात में वो क्या करें। इतना ही नहीं आशंका है कि अभी हालात और भी बिगड़ सकते हैं। दुनिया के देशों के लिए सबसे चिंता की बात ये है कि अबतक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए कोई वैक्सीन या फिर नहीं दवाई खोजी जा सकी है। हालांकि दुनियाभर डॉक्टर और वैज्ञानिक इसकी खोज में जुटे हैं।

सारी दुनिया को ठप कर देने वाले कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर ICMR के बड़े वैज्ञानिक ने अहम डेडलाइन दी है। वैक्सीन बनाने में जुटी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक निर्मल कुमार गांगुली का दावा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन इस साल तैयार होना मुमकिन नहीं होगा।

कोरोना वैक्सीन बनाने की दिशा में ICMR और भारत बायोटेक तेज़ी से बढ़ रहे हैं। लेकिन, वैक्सीन बनाने के लिए जो अहम चरण पूरे करने हैं, उनमें अब तक सिर्फ़ एक ही स्टेप पूरा किया जा सका है। अभी देश के वैज्ञानिकों ने कोरोना फैमिली के वायरस कोविड 19 का आनुवांशिक कोड ही पहचाना है। यानी कोरोना वायरस शरीर पर कितना असर करता है और कैसे असर करता है। अभी इसकी पहचान की गई है। वैक्सीन तक पहुंचने के लिए अभी लंबा सफ़र तय करना होगा।

‘2021 में तैयार हो सकती है वैक्सीन

भारत में वैक्सीन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक भारत बायोटेक जेफरसन और ICMR  कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं। अब आधिकारिक तौर पर मिलकर वैक्सीन तैयार करने के लिए दोनों संस्थान दिन-रात जांच-पड़ताल में जुटे हैं। फिलहाल, बायोटेक कंपनी, थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी ऑफ फिलाडेल्फिया के साथ मिलकर वैक्सीन बनाने में जुटी है। हालांकि, ICMR के पूर्व महानिदेशक एनके गांगुली मानते हैं कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनाया जा रहा टीका अगले साल 2021 के जनवरी या फरवरी महीने में ही उपलब्ध हो पाएगा।

लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि जब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, तो कोरोना वैक्सीन बनने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है ? इन सवालों के जवाब ज़रा ध्यान से देखिए…

  • सबकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग-अलग होती है
  • इसलिए एक ही बीमारी से ठीक होने में अलग-अलग वक्त लगता है
  • इसी तरह एक ही वायरस अलग-अलग तरीके से बीमार करता है
  • वैक्सीन के लिए सबसे पहले वायरस की ताक़त पहचानना ज़रूरी है
  • वायरस की अधिकतम क्षमता से ही वैक्सीन का रास्ता तैयार होता है
  • वैक्सीन वायरस की अधिकतम ताक़त के हिसाब से बनाई जाती है
  • टीके को वायरस से ज़्यादा ताक़तवर बनाने के लिए कई ट्रायल होते हैं
  • सबसे ताक़तवर वायरस पर असरदार होने वाला टीका ही फाइनल होता है
  • टीका ऐसा बनाया जाता है, जो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों पर असर करे

कोरोना वैक्सीन की उम्मीद में ICMR और उसकी सहयोगी संस्थाओं को अब तक एक बड़ी कामयाबी मिली है। इसीलिए, वैक्सीन को लेकर काफ़ी सकारात्मक तरीके से मेडिकल संस्थाएं काम कर रही हैं। पुणे की वायरोलॉजी ने कोविड-19 वायरस का स्वभाव और उसके हमला करने की प्रक्रिया को डिकोड कर लिया है।

  • वैक्सीन के लिए वायरस का आनुवंशिक कोड जानना ज़रूरी है
  • वायरस प्रोटीन के कांटेदार गुच्छे की तरह होता है
  • वायरस के शरीर पर हमले को लेकर पूरी रिसर्च होती है
  • वायरस को हमले में कितना समय लगा, इसकी जांच होती है
  • वायरस ने शरीर को कितना बीमार किया, इसकी जांच होती है
  • शरीर के किस हिस्से को ज़्यादा नुकसान पहुंचा, ये भी जांच होती है
  • ये सब कांटेदार प्रोटीन के गुच्छे की पूरी स्टडी के बाद पता चलता है
  • कई तरह की केस स्टडी की जांच से वायरस का स्वभाव पता लगता है
  • केस स्टडी की जांच से वायरस का अनुवांशिक कोड पता लगाया जाता है
  • वायरस का आनुवांशिक कोड पहचानकर वैक्सीन की प्रक्रिया शुरू होती है
  • वैक्सीन ऐसी बनाई जाती है कि वो वायरस का आनुवांशिक कोड पहचान ले
  • वायरस का आनुवांशिक कोड ना पहचान पाने वाली दवा बेअसर होती है
  • आनुवांशिक कोड पहचानने वाली वैक्सीन ही वायरस को ख़त्म करती है

फिलहाल वायरस का आनुवांशिक कोड पहचानने के बाद सार्स-कोविड-2 के तेज़ी से बढ़ रहे प्रभाव और उसके असर को समझने में काफ़ी मदद मिल रही है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस के हर तरह के व्यवहार को पहचानने वाली रिपोर्ट में जब पूरी तरह सफलता मिल जाएगी और वायरस के हर हमले को अच्छी तरह समझ लिया जाएगा, तो टीका तैयार होगा। ऐसा टीका, जो लोगों के इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ा सके.. फिर इम्यून रिस्पॉन्स को मज़बूत करके कोरोना वायरस को शरीर से ख़त्म करने की पूरी प्रक्रिया की स्टडी होगी।

  • टीका लोगों पर अलग-अलग तरह से असर कर सकता है
  • इसलिए सभी तरह के ट्रायल की स्टडी करनी होती है
  • सबसे पहले जानवरों पर क्लीनिकल ट्रायल किया जाता है
  • फिर इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा

जब टीका ज़्यादा लोगों पर असरदार होगा, तभी वो सही होगा। इसके बाद उनकी जांच होगी जिन पर टीका बेअसर रहा। दोनों स्टडी को मिलाकर परफेक्ट वैक्सीन की प्रक्रिया शुरू होगी। वैक्सीन के पूरे प्रोजेक्ट में काफ़ी समय लग सकता है। इसीलिए आशंका है कि 2021 में जनवरी या फरवरी तक वैक्सीन मिलेगी। फिलहाल कोरोना वायरस का इलाज करने के लिए डॉक्टरों कई तरह-तरह की दवाएं और प्रक्रिया अपना रहे हैं, वो काफ़ी हद तक इसमें सफल भी हो रहे हैं। लेकिन, कोरोना वायरस की वैक्सीन इसलिए ज़रूरी है कि इस तरह की महामारी को रोकने में टीका ही कामयाब हो सकता है। टीके का सबसे बड़ा फ़ायदा ये होगा कि ये लंबे समय तक वायरस को निष्क्रिय रखता है और संक्रमण फैलने की संभावनाओं को शून्य तक ला देता है।

 

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