Tuesday, June 2, 2020

Coronavirus: हर 15 मिनट में पानी पीने से कम हो जाता है कोरोना का खतरा, जानें- क्या है सच्चाई ?

Coronavirus: कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19  के जानलेवा विषाणु के तेजी से बढ़ते मामले को बीच अफवहों का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि हर 15 मिनट पर पानी पीने से कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) जानलेवा विषाणु से भारत समेत दुनियाभर के 200 देशों में कोहराम मचा है। चीन के वुहान से चले कोरोना के जानलेवा विषाणु से भारत में भी अफरा-तफरी का माहौल है। भारत में भी कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामले को देखते हुए अफरा-तफरी है। अफवहों का बाजार गर्म है। इसको फैलने से रोकने के लिए और इसके इलाज के लिए कई तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं। वायरस से बचने के लिए कई तरह की भ्रामक सलाहें लोगों को दी जा रही हैं। इस बीच एक खबर तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि हर 15 मिनट के  अंतर पर पानी पीने से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

दरअसल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि 15 मिनट के अंतराल पर पानी पीने से कोरोना वायरस से बचा जा सकता है। इसके पीछे तर्क दि‍या जा रहा है कि अपने गले को तर रखना चाहिए। और हर 15 मिनट में पानी पीना चाहिए। ऐसा करने से हमारी ग्रासनली से वायरस साफ हो जाएंगे और फिर पेट में जाकर एसिड से मर जाएगा।

कहना है कि संक्रमण किसी एक वायरल कण से नहीं होता बल्कि हजारों-लाखों पार्टिकल्स के संपर्क में आने से होता है, इसलिए केवल ग्रासनली की सफाई से बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

जानकारों का कहना है कि ग्रासनली से पहले ही आपकी नाक से भी वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर चुका होगा। ऐसा न भी हो तो आंखों से या अन्य रास्तों से वायरस प्रवेश कर सकता है। संक्रमित जगह या सतह को छूकर आप अपनी आंखें छुएंगे और वायरस आपको संक्रमित कर देगा। किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकले ड्रॉपलेट्स आपकी सांसों के जरिए अंदर जाकर भी आपको संक्रमित कर सकते हैं।

पेट में मौजूद अम्लीय रसों का पीएच (PH) यानी (अम्लीयता का पैमाना) 1 से 3 के बीच में होता है, जिसमें वायरस के मरने की पूरी संभावना नहीं होती। साल 2012 में सऊदी अरब में कोरोना फैमिली का ही एक वायरस पैथोजेन आया था। इस वायरस में हल्के एसिड या पेट में मौजूद एसिड के खिलाफ प्रतिरोध करने की शक्ति थी। वैज्ञानिकों ने पाया था कि वायरस मरीजों के पेट में भी जीवित रहकर आंत की कोशिकाओं पर आसानी से हमला कर सकता है।

वहीं नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने भी इस मैसेज को देखने के बाद इसका फैक्ट चेक किया। एनडीएमए ने कहा, ‘दावा कि, नम गला, कोरोना संक्रमण से बचाव कर सकता है। जबकि फैक्ट ये है कि ये दावा पूरी तरह गलत है। इस दावे के पक्ष में कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।’विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि कोरोना वायरस गर्म मौसम में जीवित रह सकता है। कोविड-19 उन देशों में फैल रहा है जहां पर गर्म और उमस भरा मौसम है और साथ ही उन देशों में भी जहां की जलवायु ठंडी और शुष्‍क है। एक अन्य बयान में, डब्ल्यूएचओ ने कहा, ‘पानी पीने से हाइड्रेटेड रहना समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कोरोना संक्रमण को रोकता नहीं है।’

गौरतलब है कि पानी पीने की आदत अच्छी है, यह आदत पेट और त्वचा संबंधी कई तरह की बीमारियां नहीं होने देती, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के मामले में इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस दावे पर बिना किसी पुष्टि सामने आए बिना विश्वास करना खतरनाक हो सकता है।

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