Friday, July 10, 2020

Corona Pandemic: कोरोना पर दुनिया की सबसे अच्छी खबर, एक-दो नहीं आ रही हैं 6 वैक्सीन

दुनिया भर में तीन लाख 70 हजार  से ज़्यादा लोगों की जान लेने वाले कोरोना वायरस को रोकना इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है। अब तक भले ही कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं मिली, लेकिन ये जानकर आपको हौसला मिलेगा कि पहली बार सारी दुनिया बहुत तेज़ी के साथ किसी वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटी है।

पल्लवी झा, नई दिल्ली: दुनिया भर में तीन लाख 70 हजार  से ज़्यादा लोगों की जान लेने वाले कोरोना वायरस को रोकना इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है। अब तक भले ही कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं मिली, लेकिन ये जानकर आपको हौसला मिलेगा कि पहली बार सारी दुनिया बहुत तेज़ी के साथ किसी वायरस की वैक्सीन बनाने में जुटी है। जिस रफ़्तार से वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए रिसर्च कर रहे हैं, वो असाधारण है। मेडिकल साइंस की दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ जब एकसाथ सौ से ज़्यादा वैक्सीन पर काम चल रहा है, लेकिन 6 वैक्सीन ऐसी हैं, जो कोरोना वायरस का सबसे पक्का इलाज हो सकती हैं।

इबोला वायरस की वैक्सीन बनकर विकसित होने में 16 साल का वक़्त लगा। आमतौर पर वैक्सीन बनने में 10 से 15 साल का समय लग जाता है लेकिन, कोविड-19 वायरस अब तक के सभी वायरस से बिल्कुल अलग है और बहुत तेज़ी से फैल रहा है। ठीक उसी तरह वैज्ञानिकों ने भी वैक्सीन बनाने की रफ्तार को सैकड़ों गुना बढ़ा दिया है। कोविड-19 वायरस को ख़त्म करने के लिए दुनिया में 6 वैक्सीन ने बहुत उम्मीदें जगाई हैं।

वैक्सीन नंबर 1: mRNA-1273
सारी दुनिया को ये जानकर राहत मिलेगी कि सिर्फ़ तीन महीने में कोविड-19 की वैक्सीन पर काम करने वाली 90 रिसर्च टीमें एक अहम मुक़ाम पर पहुंच गई हैं। 90 रिसर्च टीमों ने 6 वैक्सीन को एक बड़े लक्ष्य तक पहुंचा दिया है।

  • इम्यून सिस्टम को ट्रेनिंग देगी
  • मॉडर्ना थेराप्युटिक्स एक अमेरिकी बॉयोटेक्नॉलॉजी कंपनी है
  • ये कंपनी कोविड-19 की वैक्सीन के लिए नई रिसर्च कर रही है
  • ये ऐसी वैक्सीन बना रही है जो प्रतिरोधक क्षमता को ट्रेनिंग देगी
  • यानी ये कोरोना से लड़ने के लिए शरीर में ट्रेनर का काम करेगी
  • इसमें जीवित लेकिन कमज़ोर और निष्क्रिय विषाणुओं का इस्तेमाल होगा
  • ये वैक्सीन मैसेंजर RNA या मैसेंजर राइबोन्यूक्लिक एसिड पर आधारित है
  • इसके लिए लैब में कोरोना वायरस का जेनेटिक कोड तैयार किया गया है
  • फिर वैक्सीन और वायरस का छोटा सा हिस्सा शरीर में इंजेक्ट किया जाएगा
  • इसके बाद वैक्सीन संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिक्रिया करेगी
  • इससे इम्यून सिस्टम तेज़ी से वायरस को ख़त्म करने लगेगा।

वैक्सीन नंबर 2: INO-4800
अमेरिका की एक और कंपनी है, जो बिल्कुल अलग तरह से काम करने वाली वैक्सीन तैयार कर रही है।
DNA इंजेक्ट किया जाएगा।

  • INO-4800 वैक्सीन अमेरिकी कंपनी तैयार कर रही है
  • ये ऐसी वैक्सीन होगी, जो मरीज़ की कोशिकाओं में इंजेक्ट होगी
  • ये वैक्सीन शरीर में एक छोटी आनुवंशिक संरचना जैसी होगी
  • वैक्सीन को DNA की तरह विकसित करके उसे इंजेक्ट किया जाएगा
  • वैक्सीन का DNA मरीज़ के शरीर में एंटीबॉडीज़ का निर्माण शुरू करेगा
  • ये बिल्कुल नई तकनीक होगी, जिसमें वैक्सीन अपना DNA बदल सकेगा।

वैक्सीन 3: AD5-nCoV
ख़ास बात ये है कि अब तक जिन वैक्सीन पर काम चल रहा है, वो बदले हुए दौर की सबसे उच्च तकनीक के ज़रिए तैयार हो रही हैं।

  • चीन एक ऐसी वैक्सीन बना रहा है, जो संदेशवाहक बनेगी
  • इसमें एडेनोवायरस के एक ख़ास वर्ज़न का इस्तेमाल होगा
  • वायरस के समूह को एडेनोवायरस कहा जाता है
  • एडेनोवायरस में मौजूद विषाणु वेक्टर मौजूद होते हैं
  • ये वेक्टर प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं
  • वैक्सीन के तहत ऐसा वेक्टर तैयार होगा, जो मैसेंजर बनेगा
  • वेक्टर का संदेश पाते ही प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाएगी
  • वेक्टर उस प्रोटीन को सक्रिय कर देते हैं जो संक्रमण से लड़ते हैं।

अब तक जितनी भी वैक्सीन बन रही हैं, उन्हें इस तरह विकसित किया जा रहा है, जो हमारी आंखों, सांस की नली, फेफड़े, आंतें और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती हैं। क्योंकि, कोविड-19 वायरस भी शरीर के इन्हीं हिस्सों को तेज़ी से संक्रमित करता है। कोरोना वायरस की वैक्सीन का विज्ञान ऐसा है, जो अब तक शायद ही किसी वैक्सीन में इस्तेमाल हुआ हो.. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि किसी भी वायरस को कमज़ोर करने या ख़त्म करने के लिए उससे भी एडवांस तरह की दवा की ज़रूरत होती है। कोविड-19 वायरस जितनी तेज़ी से फैलता है और शरीर के जितने भी अंगों पर असर डालता है, तो वैक्सीन भी ऐसी बन रही है, जो उससे कई गुना तेज़ी से असर कर सके और शरीर के संक्रमित अंगों को बचा सके। इसके अलावा कोरोना की वैक्सीन ऐसी होगी, जो कोविड-19 वायरस के हर लक्षण को फौरन समझ सके और शरीर को उससे लड़ने के लिए अलर्ट कर सके।

वैक्सीन नंबर 4: LV-SMENP-DC
जिस चीन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लग रहा है, अब वो वैक्सीन की रेस में काफ़ी आगे है.. वो एक एडवांस तरह की वैक्सीन बना रहा है।

  • HIV के फॉर्मूले से बन रही वैक्सीन
  • चीन के शेंज़ेन जीनोइम्यून मेडिकल इंस्टीट्यूट में ट्रायल चल रहा है
  • ये वैक्सीन एड्स के लिए ज़िम्मेदार लेंटीवायरस से तैयार की गई है
  • इस वैक्सीन में प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने वाली कोशिकाएं हैं
  • लेकिन, इस वैक्सीन को एड्स की दवा से ज़्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश है।

वैक्सीन नंबर 5: निष्क्रिय वायरस
चीन के वुहान को कोरोना वायरस का सेंटर माना जाता है.. सबसे पहले कोरोना का संक्रमण यहीं फैला था और माना जाता है कि सारी दुनिया में कोरोना फैलाने के लिए ये शहर और यहां की वेट मार्केट ज़िम्मेदार है, जहां दुनिया भर के जंगली जानवर, कीट-पतंगे और चमगादड़ समेत कई विषैले जीव-जंतू ख़रीदे और खाए जाते हैं।

  • कमज़ोर वायरस से बनेगी वैक्सीन
  • चीन के वुहान में एक अलग तरह की वैक्सीन बन रही है
  • वुहान वाली वैक्सीन निष्क्रिय वायरस से बनाई जा रही है
  • ये वुहान बॉयोलॉजिकल प्रोडक्ट्स इंस्टीट्यूट में तैयार हो रही है
  • इस वैक्सीन के लिए निष्क्रिय वायरस में कुछ बदलाव हो रहे हैं
  • ऐसे बदलाव जिससे वायरस किसी को बीमार करने की क्षमता खो देते हैं
  • निष्क्रिय वायरस हमारे शरीर में चुपचाप पड़े रहते हैं
  • जब कोविड-19 का हमला होगा, तो निष्क्रिय वायरस सक्रिय हो जाएंगे
  • निष्क्रिय वायरस अपनी फैमिली के वायरस को निष्क्रिय कर देते हैं
  • इसलिए निष्क्रिय वायरस वैक्सीन के ज़रिए शरीर में इंजेक्ट किए जाएंगे।

वैक्सीन- 6: ChAdOx1
वैक्सीन तैयार करने की सबसे सामान्य तकनीक ये होती है कि वायरस के जेनेटिक कोड को पहचान लिया जाए और फिर वैसे ही जेनेटिक कोड को पहचानने वाली दवा बनाई जाए। ताकि जब भी वायरस का हमला हो, तो वैक्सीन अपना असर दिखाना शुरू कर दे। हालांकि, ये एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई साल का वक्त लग जाता है फिर भी मौजूदा हालात में बहुत तेज़ी से काम चल रहा है।

  • कमज़ोर वायरस से बनेगी वैक्सीन
  • ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में ये वैक्सीन बन रही है
  • ऑक्सफोर्ड में ChAdOx1 वैक्सीन का विकास किया रहा है
  • 23 अप्रैल को यूरोप में इसका पहला क्लीनिकल ट्रायल हुआ था
  • इसके लिए लैब में वायरस तैयार हो रहे हैं, जो नुकसानदेह नहीं हैं
  • ऐसे वायरस को प्राथमिक ट्रायल के लिए इस्तेमाल किया जाता है
  • ट्रायल में पहले वायरस के सबसे कमज़ोर स्वरूप का इस्मेताल होता है
  • ताकि जिस पर ट्रायल हो रहा है, उसे वायरस नुकसान ना पहुंचा सके
  • वायरस को ऐसा बनाया जा रहा है, ताकि वो अपना विकास ना कर सके
  • वैक्सीन में मौजूद वायरस की सतह पर प्रोटीन प्लांट किया जाता है
  • ताकि कोरोना का हमला होते ही प्रोटीन इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर दे।

    दुनिया में जिन 6 वैक्सीन पर काम चल रहा है, उनके अलावा भारत में भी वैक्सीन बनाने का काम जारी है। लेकिन, ब्रिटेन और चीन फिलहाल इस रेस में सबसे आगे हैं। फिर भी सबसे असरदार वैक्सीन बनकर इस्तेमाल के लिए तैयार होने में कई महीने लग सकते हैं। क्योंकि, दुनिया में तब तक कोरोना संक्रमित का आंकड़ा करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। ऐसे में कई करोड़ वैक्सीन की ज़रूरत होगी।

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