RPSC Recruitment 2018: स्कूल व्याख्याता भर्ती फिर से चर्चा में, अभ्यर्थियों ने 14 फीसदी पद बढ़ाने की मांग की, जानें क्या है पूरा मामला

RPSC Recruitment 2018: स्कूल व्याख्याता भर्ती फिर से चर्चा में, अभ्यर्थियों ने 14 फीसदी पद बढ़ाने की मांग की, जानें क्या है पूरा मामला

Sports News24
Nirmal Kumar PareekNews243rd June 2021, 6:30 am
RPSC Head Masters Recruitment 2021

RPSC School Lecturer Recruitment 2018: राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई स्कूल व्याख्यता भर्ती परीक्षा 2018 (RPSC School Lecturer Exam 2018) एक बार फिर से चर्चाओं में है। दरअसल स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2018 में 14 फीसदी पद कटौती से पीड़ित 689 अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदेश के बहुत से विधायकों और बेरोजगार संघ के पदाधिकारियों ने ट्वीट कर सरकार से पीड़ितों को न्याय देने की मांग की है।

सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे छात्र सरकार और आयोग का ध्यान खींचने के लिए लगातार नए-नए प्रयास कर रहे हैं। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए इन बेरोजगारों ने सोशल मीडिया पर अपना अभियान छेड़ रखा है, जिसके तहत तरह-तरह के कार्टून और व्यंग्यात्मक चित्र तैयार करके सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है।

बता दें कि राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा 2018 में स्कूल व्याख्यता के 5000 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती के लिए प्रदेश भर के लाखों उम्मीदवारो ने अप्लाई किया था। इस परीक्षा को पिछले साल जनवरी में आयोजित किया गया था और इसका रिजल्ट 24 जून 2020 में जारी कर दिया गया था। रिजल्ट जारी होने के बाद से ही यह भर्ती विवादों में उलझ गई।

क्या है पूरा मामला?

स्कूल व्याख्याता भर्ती 2018 का विज्ञापन 13 अप्रैल 2018 को जारी हुआ था। राज्य सरकार ने दो बार परीक्षा स्थगित करके डेढ़ साल बाद में सामान्य वर्ग से 14 फीसदी पद कम करके 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस और 4 फीसदी एमबीसी को दे दिया। इस कटौती के कारण 689 अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। इन अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन करके राजस्थान लोक सेवा आयोग ने वेटिंग रैंक जारी भी कर दी है।

पीड़ित अभ्यर्थियों का तर्क –

अभ्यर्थियों ने सरकार को ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को लेकर फैसला दिया है कि आरक्षण 50 फीसदी से ऊपर नहीं हो सकता है। राजस्थान में व्याख्याता भर्ती 2018 में भी इसी तरह का मामला है। जब भर्ती निकली थी 2018 में तो आरक्षण 50 परसेंट था, लेकिन जून 2019 में 14 फीसदी (10 फीसदी EWS के लिए 4 फीसदी MBC के लिए) आरक्षण लागू कर दिया, जिसके कारण अनारक्षित श्रेणी के लिए केवल 36 फीसदी कोटा ही बचा। इसके कारण 14 फीसदी अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी इस भर्ती से सीधे तौर पर बाहर हो गए।

इन 689 अभ्यर्थियों ने अपना हक पाने के लिए जयपुर में शहीद स्मारक पर लगातार 22 दिन धरना प्रदर्शन किया और शिक्षामंत्री के सकारात्मक आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद जब सरकार ने पद बढ़ोतरी के आदेश जारी नहीं किए तो अभ्यर्थियों ने सुजानगढ़ में धरना प्रदर्शन किया।

शिक्षामंत्री ने दिया था आश्वासन –

पीड़ित छात्रों का कहना है कि शिक्षामंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कातर जनसभा में हजारों मतदाताओं के सामने स्कूल व्याख्याता भर्ती 2018 में काटे गए 14 फीसदी पद पुन: सृजित करने की घोषणा कर दी लेकिन अभी तक 14 प्रतिशत पद वृद्धि की अधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है।

इस भर्ती में 14 फीसदी पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यार्थी सोशल मीडिया पर कैम्पेन चला रहे हैं और अब इसमें इन्हें विधायकों का भी समर्थन मिल रहा है। इन अभ्यर्थियों के समर्थन में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हेमाराम चौधरी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावडिय़ा, महेंद्र बिश्नोई, विजयपाल मिर्धा, मीना कंवर, बलवान पूनिया ,गिरधारी माहिया, सुरेश मोदी, शोभारानी कुशवाह ,चंद्रकांता मेघवाल सहित अनेक विधायकों ने सोशल मीडिया पर सरकार के समक्ष अभ्यर्थियों की मांग रखी।

इसके आलावा सांसद मनोज राजोरिया, नरेंद्र खीचड़, राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा, किसान नेता राकेश टिकैत, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत अनेक पक्ष-विपक्ष के विधायकों ने इस मांग को ट्विटर और पत्र के माध्यम से सरकार के समक्ष रखा है।

 



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