Delta Plus Variant: कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट पर कौन सी वैक्सीन कितनी हैं असरदार? जानें पूरी जानकारी

Delta Plus Variant: कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट पर कौन सी वैक्सीन कितनी हैं असरदार? जानें पूरी जानकारी

Sports News24
Neharika GuptaNews243rd July 2021, 1:55 pm
coronavirus

कोरोना वायरस (Coronavirus) का खतरा अभी टला नहीं है, लेकिन वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) आने के बाद इससे निपटने की रफ्तार में तेजी आने की उम्मीद थी। शुरुआत में ऐसा लगा भी, लेकिन लगातार रूप बदल रहे कोरोना ने अलग-अलग वेरिएंट्स के जरिए एक्सपर्ट्स के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नए वेरिएंट्स पर वैक्सीन असरदार होंगी या नहीं?

कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट नया खतरा बनकर सामने आया है। वैक्सीन निर्माता अपने प्रोडक्ट को लेकर डेटा जारी कर रहे हैं। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा समेत सभी वेरिएंट्स में डेल्टा को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। यह पहली बार भारत में अक्टूबर 2020 में मिला था और अब इस वेरिएंट की मौजूदगी 96 देशों में है। कहा जा रहा है कि यह जल्द ही सबसे प्रभावी स्ट्रेन के रूप में ब्रिटेन में मिले अल्फा की जगह लेने वाला है।

ऐसे समझिए कौन सी वैक्सीन कितनी कारगर
स्टडीज में पता चला है कि कोविड वेरिएंट्स वैक्सीन की मदद से तैयार हुए न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी लेवल को कम कर देते हैं। कमी दिखाते इन आंकड़ों के आधार पर यह समझा जा सकता है कि ये वैक्सीन अलग-अलग वेरिएंट्स के खिलाफ कितनी असरदार हैं।

फाइजर की वैक्सीन से बनी न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी लेवल्स डेल्टा वेरिएंट को 7 से 10 गुना तक कम कर देता है। मडर्ना में भी डेल्टा वेरिएंट न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी लेवल को 7 से 10 गुना तक कम कर देता है। डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ भारत बायोटेक की कोवैक्सीन में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी लेवल में तीन गुना कमी देखी जाती है। जबकि, डेल्टा के खिलाफ कोविशील्ड का प्रभाव दो गुना कम हो जाता है।

जॉनसन एंड जॉनसन ने 28 लोगों के साथ एक सैंपल स्टडी की, जिसमें लोगों को कंपनी की वैक्सीन दी गई। कंपनी ने दावा किया उनकी वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट को बेअसर कर देती है। रूस की वैक्सीन स्पूतनिक ने भी दावा किया था कि उनकी वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ असरदार है। फिलहाल, रूस कोरोना की तीसरी लहर का सामना कर रहा है।

दुनिया की पहली तीन डोज और बगैर सुई वाली ZyCov-D वैक्सीन का निर्माण भारत में हुआ है। दावा किया गया है कि क्लीनिकल ट्रायल के दौरान वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी रही। दरअसल, इस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल कोविड की दूसरी लहर के दौरान किया गया था इसलिए इसे डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ असरदार माना जा रहा है।



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