Ford के कर्मचारियों के लिए Tata बन सकता है संकटमोचक, की ये घोषणा

Tata Motors and Ford Motors

नई दिल्ली: स्वदेशी वाहन निर्माता कंपनी Tata Motors; Ford India के गुजरात और तमिलनाडु प्लांट्स का अधिग्रहण करने की योजना पर काम कर रही है। आपको बता दें कि Ford India ने हाल ही में भारत से अपनी दुकान समेटने की घोषणा की थी।

बता दें कि गुजरात में Tata Motors एक प्लांट मौजूद है जो कि वहां Ford India प्लांट से काफ़ी करीब है। लेकिन Tata Motors का तमिलनाडु में एक भी प्लांट मौजूद नहीं है। कुछ ख़बरों के मुताबिक रिपोर्ट के मुताबिक Ford India के चेन्नई स्थित प्लांट को खरीदने के लिए Tata Motors के प्रतिनिधियों ने हाल ही में तमिलनाडु सरकार से मुलाकात की थी।

बता दें कि अमेरिकन वाहन निर्माता कंपनी फोर्ड (Ford) के भारत से दुकान समेटने की घोषणा के बाद कंपनी के कर्मचारियों समेत डीलरशिप नेटवर्क तक भारी चिंता बनी हुई है। इसी बीच ऑटो डीलर्स बॉडी- फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने हाल ही में आंकड़े जारी कर डीलर्स को होने वाले नुकसान और बेरोजगार होने वाले कर्मचारियों की संख्या बताई थी, जिन्हें फोर्ड के इस औचक निर्णय ने भारी नुकसाने के मुहाने पर ला खड़ा किया।

FADA ने अपने आंकड़ों में सिर्फ फोर्ड से प्रभावित होने वाले डीलर और कर्मचारियों की संख्या को नहीं बताया है, बल्कि 2017 से भारत से अपना व्यापार समेट चुकी कंपनियों- Man Trucks, UM & Lohia, General Motors और Harley-Davidson को भी शामिल किया है। लेकिन आर्थिक तौर पर देखा जाए तो इन सभी कंपनियों में से सबसे ज्यादा निवेश नुकसान Ford डीलरों का हुआ है, जो कि करीब 2,000 करोड़ रुपये का है।

आइए जानते हैं, किस कंपनी के भारत से जाने से कितना नुकसान हुआ

कंपनी डीलर्स की संख्या प्रभावित कर्मचारियों की संख्या डीलर निवेश

(करोड़ रुपए में)

Ford India 170 40,000 2000
General Motors 142 15,000 65
Harley-Davidson 34 2,000 70
Man Trucks 38 4,500 200
UM & Lohia 80 2,500 150
कुल 464 64,000 2,485

 

FADA ने की थी केंद्र से कानून बनाने की अपील

हाल ही में ऑटो डीलर्स बॉडी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने विदेशी कार निर्माताओं को भारत में अचानक अपना बिजनेस बंद करने से रोकने के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की थी।क्योंकि कंपनियों के इस तरह के एकतरफा फैसले देशभर में मौजूद उनके डीलर नेटवर्क को बड़े संकट में डाल देते हैं।

FADA ने फोर्ड मोटर से जुड़े डीलरों को सुनिश्चित करने के लिए मांग रखी थी कि केंद्र जल्द से जल्द फ्रेंचाइजी सुरक्षा अधिनियम पारित करे। इस कानून के बनने से डीलरों के लिए इस तरह की स्थिति में एक ढाल तैयार होगी। बता दें कि इस कानून की मांग लंबे समय से चली आ रही है, खासकर जनरल मोटर्स और हार्ले डेविडसन सहित तीन यूएस-आधारित वाहन निर्माताओं द्वारा पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के निर्णय लेने के बाद।

FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा था, “FADA भारत सरकार से फ्रैंचाइज़ी प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का अनुरोध कर रहा है क्योंकि इसकी अनुपलब्धता के कारण, भारतीय ऑटो डीलरों को मेक्सिको, ब्राजील, रूस, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन और कई अन्य देश, जहां यह कानून मौजूद है, के डीलर्स की तरह पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया जाता है।

FADA के मुताबिक उद्योग पर संसदीय समिति ने भारी उद्योग मंत्रालय से सिफारिश की थी कि केंद्र को देश में डीलरों के लिए अधिकार संरक्षण अधिनियम लागू करना चाहिए ताकि यह ओईएम के साथ-साथ डीलरों के नेटवर्क के लिए भी फायदेमंद हो।

इससे पहले FADA ने Ford Motor के फैसले पर हैरानी जताई थी। FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा, “डीलर्स सैंकड़ों की तादाद में कंपनियों से डेमो वाहन भी खरीदते हैं, जो अब बेकार हो जाएंगे। इसके अलावा, कंपनी ने पांच महीने पहले तक भी कई डीलरों को नियुक्त किया था। ऐसे डीलरों को अपने पूरे जीवन में सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। !”

एफएडीए ने ये भी कहा कि “जबकि फोर्ड इंडिया 4,000 लोगों को रोजगार देता है, डीलरशिप लगभग 40,000 लोगों को उनके घर के स्थानों से विस्थापित किए बिना रोजगार देती है। फोर्ड इंडिया डीलर्स के पास वर्तमान में लगभग 1,000 वाहन हैं, जिनकी कीमत लगभग  ₹150 करोड़ है।”


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