ऑटो मार्केट पर भारी पड़ी सेमीकंडक्टर की कमी, 41 फीसदी घट गई सेल

Car Market

नई दिल्ली: सेमीकंडक्टर चिप की कमी इंडियन ऑटोमार्केट पर भारी पड़ रही है। ऑटो उद्योग बॉडी सियाम द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार सितंबर-2021 में भारत में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री पिछले साल की 2,72,027 यूनिट की तुलना में 1,60,070 इकाई रही है। सियाम के मुताबिक इंडियन ऑटो मार्केट में पैसेंजर सेगमेंट में सितंबर में साल-दर-साल 41 फीसदी की गिरावट देखी गई।

क्या है सेमीकंडक्टर संकट

कोविड-19 महामारी की वजह से आई मंदी से वाहन निर्माता कंपनियों जैसे-तैसे उभरने की कोशिश में जुटी ही थीं कि उनके सामने एक नया संकट आ खड़ा हुआ है। इस नई मुसीबत की वजह से ऑटो कंपनियां बाजार से मांग होने के बावजूद गाड़ियां बेच नहीं पा रही हैं। नतीजतन बीते कुछ महीनों में कई वाहन कंपनियों के सेल्स ग्राफ में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है।

आपको ये जानना शायद दिलचस्प लग सकता है कि कई ऑटो मेकर कंपनियों के लिए एक नाखुन बराबर चीज ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। ये है सेमीकंडक्टर चिप (Semicondutor Chip)। सेमीकंडक्टर एक तरह की छोटी चिप होती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक आइटमों के साथ कारों में भी- टायर प्रेशर गेज, रेन सेंसिंग वाइपर्स और पार्किंग सेंसर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर्स का भरपूर इस्तेमाल की जाती हैं।

लेकिन कोरोना महामारी की वजह से कार निर्माता कंपनियों ने दूसरे कच्चे माल की ही तरह सेमीकंडक्टर्स की खरीद को रोक दिया, जबकि दूसरी तरफ स्मार्ट उपकरण बनाने वाली कंपनियों ने सेमीकंडक्टर्स की मांग और स्टोरेज बढ़ा दिया। इससे बाजार में सेमीकंडक्टर्स की सप्लाइ में कमी आने की वजह से दुनियाभर के कार निर्माताओं को अपना प्रोडक्शन बंद करना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक इस सब के चलते दुनियाभर के ऑटो सेक्टर करोड़ों रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है।

साल की शुरुआत में जानकारी आई थी कि बच्चों का खिलौना PlayStations भी ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। दरअसल कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन की वजह से दुनियाभर में बच्चों के इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों जैसे- प्लेस्टेशन (Play Station) की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला।

इसके अलावा दुनियाभर के तमाम व्यवसायों ने अपने डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया, साथ ही वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग्स बढ़ने की वजह से लैपटॉप/टैबलेट्स, वेबकैम और स्मार्टफोन्स की बिक्री भी बढ़ गई। इस तरह इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की मांग बढ़ते ही Semiconductor की खपत भी बढ़ गई। यहीं से कार मेकर कंपनियों के लिए मुश्किल का दौर शुरू हो गया।

माना जा रहा है कि सेमीकंडक्टर्स की आपूर्ती को बहाल करने में अभी कुछ महीने और लग सकते हैं। तब तक सेमीकंडक्टर्स की सप्लाइ में आई कमी की वजह से कारों का वेटिंग पीरियड जरूर बढ़ सकता है और वाहन कंपनियों को हो रहा घाटा भी।


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