तस्वीरों में देखें Royal Enfield का इतिहास, राइफल के पुर्जे बनाते-बनाते पहुंची यहां तक

Royal Enfield 350cc

नई दिल्ली: पिछली आधी सदी में देश में ना जाने कितनी तकनीकें बदलीं, ना जाने कितनी बाइकें आईं और चलते-चलते रास्तों में कहीं  खो गईं। लेकिन Royal Enfield Bullet ऐसे खो जाने के लिए नहीं बनी थी। इस बाइक ने एक सदी से भी ज्यादा समय से अपनी शान को बरकरार रखा है। इसका सबूत वो सभी आंखें हैं जिनका लालच सालों बाद भी सड़क पर इठलाती बुलेट को देखकर रत्तीभर कम नहीं हुआ है।

नवंबर 1891 में, उद्योगपति बॉब वॉकर स्मिथ और अल्बर्ट एडी ने जॉर्ज टाउनसेंड एंड कंपनी ऑफ़ हंट एंड, रेडडिच को खरीदा। टाउनसेंड लगभग तब  टाउनसेंड एक सुई निर्माता कंपनी थी, जिसने तब साइकिल का निर्माण शुरू किया था।

इसके बाद स्मिथ और एडी को को रॉयल स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री ऑफ एनफील्ड, मिडलसेक्स के पार्ट्स बनाने का काम मिला। इस उपलब्धि के सम्मान में इन दोनों ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर एनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड कर दिया और अपनी बॉब वॉकर स्मिथ द्वारा डिजाइन की गई साइकिल को एनफील्ड नाम दिया।

अगले वर्ष, उन्होंने अपनी साइकिलों का नाम बदलकर Royal Enfield कर दिया गया और इनका ट्रेडमार्क ‘मेड लाइक ए गन’ पेश किया गया।

ये पहली रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल थी, जिसे बॉब वॉकर स्मिथ और फ्रेंचमैन जूल्स गोबिएट द्वारा डिजाइन किया गया था। इसे 1901 में लंदन में स्टेनली साइकिल शो में लॉन्च किया गया था।

1914 में रॉयल एनफील्ड की पहली 2-स्ट्रोक मोटरसाइकिल तैयार हुई। ये वो दौर था जब विश्व के अन्य सभी प्रमुख देशों की तरह ब्रिटेन भी प्रथम विश्व युद्ध में उलझा हुआ था। तब रॉयल एनफील्ड ने ब्रिटेन के साथ फ्रांस, बेल्जियम, संयुक्त राज्य अमेरिका और इंपीरियल रूसी सेनाओं को 770cc 6 hp V-twin बाइक्स की आपूर्ती की।

 

1930 दशक की शुरुआत होते-होते रॉयल एनफील्ड 225 सीसी 2-स्ट्रोक मॉडल से 976 सीसी वी-ट्विन मॉडल तक अलग-अलग ग्यारह मॉडल रेंज बनाने लग गई थी। आज की लोकप्रिय 350 और 500 सीसी बाइक्स भी मूल रूप से उसी दौरान तैयार की गई थी।

1933 में कंपनी की ज़बरदस्त मॉडल Z ‘साइकार’ की बिक्री शुरू हो गई। इस 148cc 2-स्ट्रोक में एक लेगशील्ड है दी गई है जो इसके सवार को सुरक्षित रखती है।

1936 में मॉडल जेएफ की रिलीज के साथ 500cc बुलेट को मौलिक रूप से बदल दिया गया है। इसमें 4-वाल्व सिलेंडर हेड के साथ एक सीधा इंजन दिया गया था।

1948 में दूसरे युद्ध के बाद के 350cc बुलट प्रोटोटाइप लॉन्च हुई जो स्विंगिंग आर्म रियर सस्पेंशन के साथ थी, जिसे फरवरी 1948 के कोलमोर कप ट्रायल में पेश किया गया। दो बुलट मोटरसाइकलों ने 1948 में इटली में आयोजित ISDT (इंटरनेशनल सिक्स डेज़ ट्रायल) में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीते।

इस ब्रिटिश मोटरसाइकिल को भारत मंगाने के लिए के.आर. सुंदरम अय्यर ने 1949 में मद्रास मोटर्स की स्थापना की।

1952 में फौज के लिए भारत सरकार की 800 ‘बुलट’ की मांग पर 1953 में समुद्र के रास्ते यह मोटरसाइकिल पहली बार हिंदुस्तान पहुंची और हम लोगों से रूबरू हुई।

1957 में जॉनी ब्रिटैन ने दूसरी बार बुलेट पर स्कॉटिश सिक्स डेज़ ट्रायल जीता और ब्रिटिश ट्रायल चैंपियनशिप में भी शीर्ष स्थान हासिल किया। 250cc क्रूसेडर मॉडल को ब्रिटेन में लॉन्च किया गया है।

1970 में यूके स्थित रॉयल इनफील्ड कंपनी के बंद हो जाने के बाद से सिर्फ भारत में इस कंपनी की बाइक्स बनाई जाने लगी। इस तरह से ‘बुलट’ ब्रिटेन से हिंदुस्तान आई और यहीं की होकर रह गई।

1977 में Enfield India ने 350cc Bullet को यूके और यूरोप में निर्यात करना शुरू कर दिया है।

1989 में रॉयल एनफील्ड ने बिल्कुल नई 500 सीसी बुलेट लॉन्च की थी, जो 24 बीएचपी पॉवर पैदा करने में सक्षम थी।

आगे चलकर हालात कुछ इस तरह हुए कि 1994 में भारत की प्रमुख ट्रैक्टर निर्माता कंपनी आयशर ग्रुप (Eicher Group) ने एनफील्ड इंडिया लिमिटेड को हमेशा के लिए अपने अधिकार में ले लिया।

1999 में ऑस्ट्रियाई कंपनी AVL की मदद से रॉयल एनफील्ड ने संशोधित 350cc ऑल-एल्युमिनियम लीन-बर्न बुलेट इंजन का उत्पादन किया, जिसे A350 के रूप में जाना जाता है। इस बाइक को जयपुर, राजस्थान के पास एक नए रॉयल एनफील्ड प्लांट में तैयार किया था।

2002 में रॉयल एनफील्ड ने थंडरबर्ड की शक्ल में एक स्टाइलिश लीन बर्न क्रूजर लॉन्च की। इसमें 1960 के दशक के बाद से रॉयल एनफील्ड पर इस्तेमाल किया जाने वाला पहला 5-स्पीड गियरबॉक्स नज़र आया।

2009 में 500cc का UCE इंजन भारत में लॉन्च हुआ।

2020 में कंपनी ने अपने 500cc UCE इंजन का उत्पादन समाप्त कर दिया।


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