अब पराली के धुएं से दौड़ेंगी गाड़ियां, नहीं फैलेगा प्रदूषण

Parali

नई दिल्ली: हर साल सर्दियों से पहले उत्तर भारत, खासतौर पर दिल्ली और एनसीआर में धुंध और वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। इसकी एक प्रमुख वजह इस मौसम में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हुए राज्यों, जैसे- उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में किसानों के द्वारा पराली जलाना भी है।

बीते कुछ सालों से केंद्र और राज्य सरकारें किसानों से पराली ना जलाने की अपील करते रहे हैं। हालांकि ये बात और है कि पराली नष्ट करने के लिए किसानों को कोई अन्य उपयुक्त विकल्प भी सरकार की तरफ़ से मुहैया नहीं कराया जाता।

बहरहाल, ख़बरों की मानें तो आने वाले समय में पराली का जलना एक समस्या नहीं रहेगी। दरअसल, पराली से बायोगैस तैयार की जा रही हैं, जिसका इस्तेमाल वाहनों में ईंधन के तौर पर किया जा सकेगा।

बता दें कि नोएडा की ग्रीन एनर्जी कंपनी ‘नेक्सजेन एनर्जिया लिमिटेड’ (NexGen Energia Limited) ने पराली और कचरे से बायोगैस बनाने की तकनीक तैयार की है। इस प्रकिया के तहत बड़ी मात्रा में जैविक खाद भी तैयार की जाएगी। जानकारी के अनुसार पराली के जलने से जो बायोगैस तैयार होगी, उसे सीएनजी स्टेशन की ही तरह बायोगैस पंप पर कंप्रेस कर गाड़ियों में भरा जा सकेगा। कंप्रेस करके सिलेंडर में भरा जाता है और ‘सीएनजी स्टेशन’ की बायोगैस पंप पर इसे गाड़ियों में रीफिल किया जा सकता है.

इस बारे में कंपनी ने जानकारी दी है कि ये बायोगैस बनाने के लिए वह पंजाब और हरियाणा के किसानों से पराली की खरीद करेगी। इतना ही नहीं, वह किसानों को कम कीमत पर जैविक खाद भी उपलब्ध कराएगी। कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने के लिए कंपनी ने हरियाणा के अंबाला में प्लांट शुरू कर दिया है।


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