आपकी कार है कितनी सेफ, लिस्ट में देखें

Tata Altroz safety test

नई दिल्ली: नई कार खरीदते समय आम भारतीय ग्राहक माइलेज और मेंटेनेंस के बारे में तो भरपूर रिसर्च करते हैं, लेकिन अवेयरनेस की कमी के चलते गाड़ी से जुड़े सबसे अहम पहलू पर ही हमारा ध्यान सबसे कम जाता है। ये पहलू है कार की सेफ्टी। यानी भारतीय ग्राहक इस बात को तकरीबन पूरी तरह नेगलेक्ट कर देते हैं कि दुर्घटना की स्थिति में हमारी नई कार हमें और हमारे परिवार को कितना सुरक्षित रखेगी?

अब सवाल है कि ये जानकारी कैसे और कहां से मिले, तो ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यानी जीएनसीएपी (GNCAP) इस संबंध में आपकी पूरी मदद कर सकता है। इस प्रोग्राम के तहत भारतीय कारों का क्रैश टेस्ट कराया जाता है और उसकी जानकारी उपभोक्ताओं को दी जाती है।

समय-समय पर जीएनसीएपी भारत में सबसे सुरक्षित कारों की आपस में तुलना कर सूची भी जारी करता है। ऐसी सबसे लेटेस्ट सूची की बात करें तो उसमें जीएनसीएपी (GNCAP) ने महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) की सबकॉम्पैक एसयूवी एक्सयूवी300 (XUV300) को भारत की सबसे सुरक्षित कार घोषित किया है. वहीं टाटा मोटर्स (Tata Motors) की प्रीमियम हैचबैक (Premium Hatchback) अल्ट्रॉज (Altroz) और टाटा मोटर्स (Tata Motors) की ही सबकॉम्पैक एसयूवी नेक्सन (Nexon) को अपने वरीयता क्रम में क्रमश: दूसरे और तीसरे पायदान पर जगह दी है।

इस सूची से आप जान सकते हैं कि जीएनसीएपी आपकी कार को कितना सुरक्षित मानता है।

यहां आप पूछ सकते हैं कि हमारी कारों को प्रमाणपत्र बांटने वाले जीएनसीएपी (GNCAP) की अपनी प्रामाणिकता क्या है? दूसरे शब्दों में कहें तो जीएनसीएपी (GNCAP) आखिर क्या बला है और कैसे काम करता है, क्या इसके मानक हैं जिन पर हमारी कारों को खरा उतरना होता है और कार ख़रीदने से पहले इस पर कितना भरोसा किया जा सकता है?

दरअसल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम की शुरुआत 1978 में अमेरिका से हुई थी। इस प्रोग्राम के तहत यूएसए में कारों का क्रैश टेस्ट कराया जाता और उसकी जानकारी उपभोक्ताओं को दी जाती। इस प्रोग्राम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए धीरे-धीरे दुनियाभर में ऐसे अलग-अलग प्रोग्राम चलाए जाने लगे। इनमें ऑस्ट्रेलियन एनसीएपी, यूरो एनसीएपी, जापान एनसीएपी, एशियन एनसीएपी, चाइना एनसीएपी, कोरिअन एनसीएपी और लैटिन एनसीएपी प्रमुख हैं। भारतीय कारों का सुरक्षा स्तर जांचने वाले ग्लोबल एनसीएपी को ब्रिटेन में रजिस्टर्ड एक चैरिटी ‘टूवर्ड्स ज़ीरो फाउंडेशन’ के तहत संचालित किया जाता है।

भारत में जीएनसीएपी (GNCAP) ने अपनी पहली क्रैश टेस्ट रिपोर्ट 2014 में जारी की थी. इस टेस्ट में टाटा नैनोडेटसन गोमारुति-सुज़ुकी स्विफ्टमारुति-सुज़ुकी ऑल्टोह्युंडई आई-10फोर्ड फीगो और फॉक्सवैगन पोलो को पांच में से जीरो रेटिंग दी थी। इस रिपोर्ट ने भारतीय ऑटो बाज़ार के साथ सरकार तक की नींद उड़ा दी। जानकारों का मानना है कि इसी रिपोर्ट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरत-फुरत में बीएस-6 मानकों के तहत नई कारों में कई सेफ्टी फीचर्स अनिवार्य कर दिए।

जीएनसीएपी कारों को रेटिंग कैसे देता है?

ग्लोबल एनसीएपी प्रोग्राम के तहत किसी भी कार को 64 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार और चालीस प्रतिशत ओवरलैप (ड्राइवर की तरफ गाड़ी का चालीस प्रतिशत हिस्सा) के साथ एक खास आकृति वाले बैरियर से टकराया जाता है। ये टक्कर 50 किलोमीटर/घंटा रफ़्तार से विपरीत दिशा से आ रही दो बराबर वजन वाली कारों के बीच आमने-सामने हुई टक्कर के बराबर प्रभावी होता है।

इस क्रैश टेस्ट के बाद किसी भी कार को वयस्क और बच्चों, दोनों के हिसाब से अलग-अलग रेटिंग दी जाती है. किसी दुर्घटना के समय कार में मौजूद सवारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए क्रैश टेस्ट में कारों में पुतले यानी डमी बिठाए जाते हैं। जीएनसीएपी की तरफ़ से किसी भी कार को दी जाने वाली रेटिंग ड्राइवर (डमी) के सिर व गर्दन, सीना, घुटना, जांघ और पैर पर लगने वाली चोटों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है। कार को मिलने वाले स्कोर में सवारियों और बच्चों की सुरक्षा की भी अहम भूमिका रहती है। इसे जांचने के लिए क्रैश टेस्ट के दौरान गाड़ी में डेढ़ से लेकर तीन साल तक के बच्चों के आकार की डमी बिठाई जाती है।

इसके अलावा कार को सीट बेल्ट रिमाइंडर, थ्री पॉइंट सीट बेल्ट रिमाइंडर, आईएसओफिक्स, 4-चैनल एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) और साइट इंपैक्ट प्रोटेक्शन फीचर के लिए भी अतिरिक्त पॉइंट मिलते हैं। जीएनसीएपी की तरफ से न्यूनतम एक स्टार रेटिंग पाने के लिए किसी कार में कम से कम ड्राइवर साइड एयरबैग होना जरूरी है।

भारतीय ग्राहकों को यह बात संतोष दे सकती है कि देश के ऑटोसेक्टर से जुड़ी कंपनियां आगे बढ़कर जीएनसीएपी को अपनी गाड़ियों को रेटिंग देने के लिए आमंत्रित करने लगी हैं। 2014 में जीएनसीएपी की भारत में एंट्री के बाद से ही यहां एक स्वदेशी एनसीएपी- ‘भारत न्यू व्हीकल असेसमेंट प्रोग्राम’ (बीएनवीएसएपी) कार्यक्रम शुरू किए जाने से जुड़े कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन बीते पांच साल में यह प्रक्रिया कहां तक पहुंची, कहना मुश्किल है।


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