किसी ऑटो कंपनी के बंद होने से उन पर क्या असर पड़ता है, जिनके पास उस कंपनी की कार है

Ford Endeavor

नई दिल्ली: अमेरिकन कार निर्माता कंपनी फोर्ड (Ford) जल्द ही भारत से अपनी दुकान समेटने जा रही है। बता दें कि जब से फोर्ड की महिंद्रा के साथ साझेदारी पर विराम लगने की ख़बरें सामने आईं, तब से भारत में अमेरिकी ब्रांड का भविष्य संदिग्ध बना हुआ था।

कंपनी ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह अपने भारतीय ऑपरेशन्स के लिए एक नए साझेदार की तलाश कर रही थी, लेकिन ब्रांड द्वारा भारतीय ऑपरेशन्स को बंद करने के कयास मीडिया रिपोर्टों में सामने आते रहे थे।

लेकिन अब फोर्ड ने पुष्टि कर दी है कि वह भारत में अपने ऑपरेशन्स को समाप्त कर देगी और देश में कारों का निर्माण बंद कर देगी। बताया जा रहा है कि कंपनी साणंद और चेन्नई  प्लांट में क्रमशः Q4 2021 और Q2 2022 तक वाहनों का निर्माण समाप्त कर देगी।

यदि ऐसा हुआ ये जानने वाली बात होगी कि जिन ग्राहकों के पास फोर्ड की कार मौजूद है, उन पर कंपनी के इस निर्णय का क्या असर पड़ने वाला है।

आफ्टर सेल्स सपोर्ट

किसी भी कंपनी के किसी देश में व्यापार बंद करने से सबसे सीधा और बड़ा असर उसके डीलरशिप नेटवर्क के साथ-साथ आफ्टर सेल्स सपोर्ट वाले मोर्चे पर पड़ता है। दरअसल, भारत जैसे प्राइस सेंसिटिव मार्केट में अधिकतर कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए कई तरह की आफ्टर सेल्स सर्विस प्रोवाइड कराती हैं, जिनमें रोड साइड असिस्टेंस फेसिलिटी जैसी सर्विसेज़ शामिल रहती हैं। लेकिन अब फोर्ड के इस फैसले के बाद कंपनी के ग्राहकों को आफ्टर सेल्स सपोर्ट मिलने में अपेक्षाकृत मुश्किलें आना तय माना जा रहा है।

सर्विसिंग और पार्ट्स अवेलेबिलिटी

हालांकि फोर्ड जैसी बड़ी कंपनियां जब भी किसी देश से व्यापार समेटती हैं तो वे अपने ग्राहकों को इस बात को लेकर सुनिश्चित करती हैं कि वे आफ्टर सेल्स नेटवर्क के साथ अपनी बिकी हुई गाड़ियों और उनके पार्ट्स को उपलब्ध कराती रहेंगी।

फिर, जानकारी ये भी है कि फोर्ड अपनी कुछ गाड़ियों को भारत में निर्यात करती भी रहेगी। इसलिए भी इस बात की भी पूरी संभावना है कि कंपनी अपनी गाड़ियों के पार्ट्स को भी भारत में भेजती रहेगी।

लेकिन आमतौर पर ये शिकायत मिलती रही है कि विदेशी गाड़ियों के पार्ट्स भारत में अपेक्षाकृत देरी से ही उपलब्ध होते हैं, वह भी तब जब उस कंपनी का बिजनेस अपने सुचारू रूप में है।

ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि फोर्ड की जो गाड़ियां अभी ठीक स्थिति में हैं उनमें जब कोई पार्ट डलवाने की नौबत आएगी तो कंपनी कितनी आसानी से इन्हें उपलब्ध करवा पाएगी।

वहीं कुछ का मानना है कि कंपनियों के अचानक अपने पैर पीछे खींच लेने की स्थिति में कई डीलर मजबूरन वर्कशॉप में हुए निवेश की भरपाई के लिए अपने सर्विस सेंटर चलाते रहते हैं। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि कंपनी के अधिकतर डीलर इन सेंटरों को बंद कर किसी और काम में ध्यान लगाएंगे।

ऐसे में जानकारों का कहना है कि फोर्ड की वर्कशॉपों की संख्या में बड़ी कटौती देखने को मिलेगी और हो सकता है कि ग्राहकों को ऑथराइज्ड वर्कशॉप तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।

रीसेल वैल्यू

किसी चलती हुई वाहन कंपनी का अचानक से बंद हो जाना निश्चित तौर पर उसकी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू को प्रभावित करने वाला होता है। यह बात उन लोगों से बेहतर कौन जानता होगा जिन्होंने फोर्ड से पहले शेवरले और ओपेल के बंद होने पर अपनी गाड़ियां बेची थीं।

इसके अलावा फोर्ड रीसेल वैल्यू देने वाली कार कंपनियों में कभी शुमार नहीं रही है। ऐसे में अनिश्चित आफ्टर सेल्स सपोर्ट और सर्विसिंग के चलते आशंका है कि फोर्ड  गाड़ियों की रीसेल वैल्यू में और कमी देखने को मिल सकती है।

जो नयी फोर्ड खरीदने की सोच रहे हैं

फोर्ड द्वारा भारत में बिजनेस समेटने की आधिकारिक घोषणा होने के साथ ही कंपनी और इसके डीलरशिप के द्वारा मौजूदा स्टॉक खाली करने के लिहाज से अपनी गाड़ियों पर लुभावने ऑफर दिए जा सकते हैं। हालांकि आम ग्राहक तो इन गाड़ियों को खरीदने से बचना चाहेगा, लेकिन कुछ दिलेर ग्राहक ऐसे भी होंगे जो इन ऑफरों का फायदा उठाने से नहीं चूकेंगे। यदि आप भी ऐसे ही ग्राहकों में शुमार हैं तो मोलभाव भले ही जमकर करें, लेकिन उससे पहले उन बाकी बातों के बारे में भी एक बार जरूर सोचिएगा जिनका जिक्र हमने इससे पहले किया है.


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