देश के सबसे धनी मंदिर के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक की नकदी नहीं

श्रीवत्सन, तिरुपति:

दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुपति मंदिर पर भी कोरोना का साया के चलते आर्थिक संकट मंडराने लगा है। कोरोना संकट के बीच मंदिर ट्रस्ट आर्थिक संकट से जूझ रहा है। हर रोज करीब एक लाख भक्त यहां दर्शन के लिए आते थे और कलयुग के इस भगवान को दिल खोलकर चढ़ावा भी देते थे लेकिन कोरोना महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन में मंदिर को बीतें 45 दिनों में ही 400 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। खबरों के मुताबिक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के पास इतना पैसा नहीं है कि वह रोजाना के खर्चे उठा सके और मंदिर के कर्मचारियों को वेतन दे सके।

करोड़ों भक्तों की आस्था के प्रतिक तिरुपति बालाजी मंदिर को जब भी आपने देखा होगा यहां पर भक्तों की लम्बी लम्बी कतार नार आती थी। इतने भक्त की भगवान् के चंद सेकेण्ड के दर्शनों के लिए 6 घंटे से लेकर 2 दिन तक का वक़्त लग जाता था लेकिन कोरोना महामारी के चलते यह मंदिर 20 मार्च से श्रद्धालुओं के लिए बंद है। ऐसे में चढ़ावा आना भी बंद हो गया तो लोक डाउन के इस पीरियड में गरीबों के साथ साथ बालाजी मंदिर और इससे जुड़े अन्य मंदिरों के नियमित पूजा पाठ के खर्चे के चलते मंदिर में नकदी का संकट भी आ गया है। मंदिर प्रसाशन को अपनी आमदनी से हर महीने करीब 300 करोड़ रूपये तनख्वाह और पेंशन पर खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में अब इसमें मुश्किल आ रही है। वेतन कतौती जैसे तमाम उपाय अपनाने के बाद भी हालत काबू में नहीं आ रहे हैं। मंदिर प्रसाशन नहीं चाहता की वह भगवान के नाम पर सालों से जमा हो रहे सोने चांदी या फिक्स डिपोजिट की रकम के साथ कोई छेड़छाड़ करें।

अभी मंदिर के पास सोना और फिक्स्ड डिपोजिट से मिलने वाले ब्याज का सहारा तो है, लेकिन उसके पास जमा नकदी बिल्कुल खत्म हो गयी है। मंदिर प्रशासन ने लॉकडाउन में पहले ही 300 करोड़ रुपये कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देने और अन्य जरूरी तय चीजों के लिए खर्च कर दिया है। ऐसे में प्रशासन मंदिर के नाम पर जमा 8 टन सोना और 1400 करोड़ रुपये की फिक्स डिपॉजिट को हाथ लगाए बिना इस गंभीर आर्थिक संकट से उबरने के रास्ते तलाश रहा है। तिरुपति मंदिर ने साल 2020-21 वित्तीय वर्ष के लिए 3,309 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया था लेकिन 20 मार्च से मंदिर बंद होने के बाद अकेले हुंडी कलेक्शन में ही मंदिर को 150 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा दर्शन के टिकटों की बिक्री भी बंद है और प्रसाद, दान और आवास से मिलने वाले राजस्व पर भी ग्रहण लग गया है। बालों की बिक्री से होने वाली 100 करोड़ रूपये तक की कमाई भी अब रुक गयी है।

मंदिर की कमाई पर नज़र डाले तो साल भर वी-वीआईपी, सितारों और आम भक्तों से सजे रहने वाले तिरुपति बालाजी मंदिर को को हर साल कुल 2,894 करोड़ रूपये की आय होती है और लगातार इसमें हर साल इजाफा भी होता है। हर साल भक्तों के चढ़ावे से होने वाली आय ही 1,300 करोड़ रूपये अनुमानित है, जबकि विभिन्न जमा योजनाओं से मिलने वाला ब्याज ही 747.56 करोड़ रूपये हैं। यही नहीं बालाजी के दर्शनों के लिए देश-विदेश से आने वाले भक्तों को बेचे जाने वाले शीघ्र और ब्रेक दर्शन टिकेट के जरिये 246 करोड़ रूपये, लड्डू प्रसाद की बिक्री के जरिये 180 से 200 करोड़ रूपये और भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले बालों की नीलामी से 125 करोड़ रूपये की कमाई हो जाती थी। यानी की भक्तों द्वारा भगवान पर ऐसा प्यार लुटाया जाता था की खजाना भी लगातार भर रहा था। आपको बता दें कि हैदराबाद से लगभग 550 किमी दूर पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर बालाजी के दर्शन के लिए पिछले साल 2.26 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मंदिर के लिए कहा जाता है की यहाँ का किचन दुनिया के सबसे बड़े किचन में से एक है और अन्नदानम की एसी व्यवस्था है की यहां रोज बड़े बड़े बर्तनों में हजारों लोगों के लिए खाना तैयार होता है। इस किचन में 1100 लोगो की टीम खाना बनाने से लेकर भक्तों को उसे खिलाने तक के काम में जुटी रहती थी। लेकिन अब यहां पर भी सन्नाटा है।

एक अनुमान के मुताबिक इस वक़्त मंदिर के पास 60 से 70 हज़ार करोड़ रुपये से भी अधिक की संपत्ति मौजूद है, जो हिन्दुस्तान के कुल बजट का 50वां हिस्सा है। यही नहीं यहां चढ़ावे को इकट्ठा करने और उन्हें बोरियों में भरकर गिनने के लिए पांच दर्जन से भी अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की गयी है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल बालाजी भगवान को भक्त 350 किलोग्राम सोना और 500 किलो से भी अधिक की चांदी भेंट के रूप में चढाते हैं, बावजूद इसके दो महीने के लोक डाउन में ही भगवान बालाजी मंदिर की कमाई पर मानों पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। आर्थिक समस्या भी एसी की मंदिर ने 1300 संविदा कर्मचारियों को 1 मई से काम पर नहीं आने को बोल दिया है। कहा गया की 30 अप्रेल को इनका कोंट्रेक्ट ख़त्म हो गया था। अब तक मंदिर प्रसाशन अपने इन सभी खर्चों को मंदिर की करीब 220 करोड़ रूपये तक की होने वाली मासिक आय के चलते पूरा कर लेता था, लेकिन लॉकडाउन के चलते मंदिर को बंद करना पड़ा। जिसके बाद से मंदिर के राजस्व में भारी कमी आई है। सामान्य दिनों में 80 हजार से एक लाख लोग मंदिर में आते थे, त्योहारों के दिनों में यह संख्या एक लाख से भी अधिक हो जाती थी, लेकिन भक्तों की कतार बंद हो चुकी है, केवल मंदिर के पुजारी ही नियमित पूजा पाठ कर रहे हैं। लेकिन अब पिछले 50 दिनों से ये मंदिर बंद है। ऐसे में मंदिर ट्रस्ट के पास नकदी का संकट आ गया है।

भले ही मंदिर को होने वाली कमाई रुक गयी है लेकिन मंदिर का सेवा कार्य अब भी जारी है। यानी की कोरोनावायरस के चलते मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए जरू बंद हुए लेकिन एक और परंपरा अब भी जारी है। यहां प्रतिदिन बनने वाला अन्न प्रसादम् पहले की तरह जारी है। लॉकडाउन के कारण जिन गरीबों को भोजन नहीं मिल पा रहा है, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् (टीटीडी) ट्रस्ट उन्हें भोजन उपलब्ध करा रहा है। सिर्फ इंसान ही क्यों, यहां पशुओं के लिए भी भोजन व्यवस्था की गई है। केवल तिरुपति ही नहीं, आसपास के एक दर्जन जिलों में मंदिरों ने प्रशासन को भोजन व्यवस्था के लिए पैसा दिया है। करीब 1 लाख 40 हजार पैकेट रोज तैयार किए जा रहे हैं। यह सिलसिला 28 मार्च से जारी है।

दरअसल मंदिर के दो हजार साल के इतिहास में संभवतः पहली बार ऐसा मौका आया है, जब इतने लंबे समय के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश रोका गया हो। 128 साल पहले 1892 में दो दिन के लिए मंदिर बंद हुआ था। हालांकि, उसकी वजह मंदिर के रिकॉर्ड में नहीं है। ऐसे में 17 मई को लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही मंदिर खुलने के आसार हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अन्न प्रसाद की व्यवस्था हमेशा होती है। आम दिनों में भी यहां हर रोज 70 हजार लोगों के लिए प्रसाद बनता है। जाहिर है की पुरे विश्व पर छाए आर्थिक संकट का का असर करोडो लोगों की आस्था के प्रतिक तिरुपति बालाजी मंदिर के कामकाज पर भी अब मंडराने लगा है. ऐसे में उम्मीद की जा सकती है की जल्द कोरोना का संक्रमण ख़त्म हो जाए।

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