Wednesday, July 8, 2020

सोमवार को इन बातों का रखें ध्यान, हर संकट से दूर रखेंगे भोले भंडारी

सप्ताह के सातों दिनों का मनुष्य के जीवन में अपार महत्व है। मनुष्य का जीवन इन्हीं सातों दिनों के इर्द गिर्द घुमता है और अपना प्रभाव डालता है। सोमवार के दिन का  भी काफी महत्व है। सोमवार को भोलेभंडारी का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा होती है।

नई दिल्ली: सप्ताह के सातों दिनों का मनुष्य के जीवन में अपार महत्व है। मनुष्य का जीवन इन्हीं सातों दिनों के इर्द गिर्द घुमता है और अपना प्रभाव डालता है। सोमवार के दिन का  भी काफी महत्व है। सोमवार को भोलेभंडारी का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा होती है। बड़ी तादाद में लोग सोमवार को भगवान शिव को जल चढ़ाने मंदिर भी जाते है। कई लोग कच्चे दूध से उनका अभिषेक भी करते है।

मान्यता है कि सोमवार के दिन जो भी भगवान शिव की भक्ति करता है उनकी पूजा करता है उस व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। वैसे भगवान शिव का दूसरा नाम भोले है और कहा जाता है कि वह अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न भी हो जाते है। लेकिन अगर उनकी पूजा पाठ में कोई कमी रह जाए तो भक्तों को उनका क्रोध भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को भोलेनाथ की पूजा में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें अगर व्यक्ति करता है तो भगवान शिव और माता पार्वती क्रोधित होते हैं। ऐसा व्यक्ति चाहें कितना भी पूजा-पाठ कर ले उन्हें पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। जब तक व्यक्ति इन कार्यों को करना नहीं छोड़ता है भगवान शिव उससे प्रसन्न नहीं होते हैं।

किसी दूसरे के धन और स्त्री पर नजर रखना, चोरी करना, जुआ खेलना, माता-पिता और देवी-देवताओं का सम्मान न करना एवं साधु संतों से अपनी सेवा करवाने वाले व्यक्ति से भगवान शिव अप्रसन्न रहते हैं। तो आईए जानते हैं भगवान शिव की पूजा में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…

सोमवार को इन बातोंं का जरूर रखें ध्यान

  • सोमवार के दिन पूजा करते हुए काले कपड़े भूलकर भी नहीं पहननें चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं की माने तो भगवान शिव को काला रंग पसंद नहीं है और काले रंग के वस्त्रों से वे क्रोधित हो जाते हैं। कोशिश करें कि सोमवार को शिव पूजा में हरा, लाल, सफ़ेद, केसरिया, पीला या आसमानी रंग के वस्त्र ही धारण करें।
  • मान्यता है कि शिवजी को सफेद रंग के फूल पसंद होते हैं, पर वहीं केतकी का फूल सफेद होने के बावजूद शिवजी की पूजा में नहीं प्रयोग होता है..
  • वहीं भगवान शिव की पूजा में शंख से जल अर्पित करने का विधान भी नहीं , इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।
  • इसके अलावा भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग भी वर्जित माना गया है।
  • साथ ही शिव पूजा में तिल का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि मान्यता है कि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है, ऐसे में तिल भगवान विष्णु को तो अर्पित किया जाता है पर शिव जी को नहीं चढ़या जाता।
  • शिव जी की पूजा में अगर आप चावल चढ़ाते हैं तो इस बात विशेष ध्यान रखें कि वे चावल खंडित यानि टूटे हुए नहीं होने चाहिए।हल्दी और कुमकुम उत्पत्ति के प्रतीक माने गए हैं, ऐसे में इनका प्रयोग भी शिव जी के पूजन में नहीं होना चाहिए।
  • साथ ही कभी भी बासी या मुरझाए हुए फूल भगवान शिव को अर्पित न करें क्योंकि इससे शिवजी क्रोधित हो सकते हैं और आपको उनके क्रोध का भागी बनना पड़ सकता है।
  • वहीं शिव जी को आप नारियल तो चढ़ा सकते हैं, पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए।

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