Thursday, July 9, 2020

आज भी यहां मौजूद हैं सीता माता की अग्‍निपरीक्षा के जिंदा सबूत, देखें तस्‍वीरें

धर्मग्रन्थों में लंका को सोने का एक ऐसा नगर कहा गया है, जिस पर त्रेता युग में रावण का राज था। रामायण काल में रावण के इस लंका का जिक्र मिलता है। आज की श्रीलंका में ऐसे कई जिंदा सबूत मिलते हैं, जिसका जिक्र हजारों साल पहले रामायण काल के धर्मग्रन्थों में किया गया है, खासकर मां सीता जुड़ी मान्यताएं।

नई दिल्‍ली: धर्मग्रन्थों में लंका को सोने का एक ऐसा नगर कहा गया है, जिस पर त्रेता युग में रावण का राज था। रामायण काल में रावण के इस लंका का जिक्र मिलता है। आज की श्रीलंका में ऐसे कई जिंदा सबूत मिलते हैं, जिसका जिक्र हजारों साल पहले रामायण काल के धर्मग्रन्थों में किया गया है, खासकर मां सीता जुड़ी मान्यताएं।

नुवारा एलिया यानी अशोक वाटिका में मौजूद सीता अम्मन मंदिर से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर एक इलाका है। इसका नाम देवनारपोल है। इस जगह को अग्निपरीक्षा स्थल भी कहा जाता है। माना जाता है कि इसी स्थान पर मां सीता ने अग्निपरीक्षा दी थी। शांत पहाड़ पर स्थित इस जगह को आज भी संरक्षित रखा गया है। गोल कुएं के आकार में बना ये अग्निकुंड उंची-ऊंची दीवारों से घिरा है। प्राचीन कालीन पत्थरों से बने विशालकाय अग्निकुंड को घेर कर रखा गया है।

बताया जाता है कि ये वहीं पहाड़ है, जहां सीता जी की खोज में लंका गए हनुमान जी सबसे पहले पहुंचे थे और, हनुमान जी ने यहीं पर माता सीता की खोज की योजना भी बनाई थी। इस पहाड़ पर आज भी हनुमान जी के विशालकाय पैरों के निशान मौजूद हैं। लंका में मां सीता से जुड़ा एक और रहस्य इस पर्वत पर छिपा है। कहा जाता है कि रावण जब माता सीता का अपहरण कर श्रीलंका पहुंचा तो सबसे पहले सीता जी को इसी जगह रखा था। इस गुफा का सिर कोबरा सांप की तरह फैला हुआ है। गुफा के आसपास की नक्काशी भी इस बात का प्रमाण है। बताया जाता है कि जब मां सीता ने रावण के महल मे रहने से इंकार कर दिया तब उन्हें अशोक वाटिका में रखा गया।

सीताजी अशोक वाटिका के जिस वृक्ष के नीचे बैठती थी, वो जगह सीता एल्या के नाम से मशहूर है। 2007 में श्रीलंका सरकार के एक रिसर्च कमेटी ने भी पुष्टि की थी कि सीता एल्या ही अशोक वाटिका है। हालांकि ऐसी मान्यता है कि बाद में हनुमान जी के लंका जलाने से भयभीत रावण ने सीता जी को अशोक वाटिका से हटा कर कोंडा कट्टू गाला में रख दिया था। पुरातत्व विभाग को यहां भी कई ऐसी गुफाएं मिली है, जो रावण के महल तक जाती थी।

एक रिसर्च के मुताबिक श्रीलंका में अब ऐसे कई जगहों की खोज की जा चुकी है, जहां रामायण कालीन निशान आज भी मौजूद हैं। रामायण में आस्था रखने वाले लोग आज उन जगहों पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और मां सीता से जुड़ी जगहों का दर्शन करते हैं।

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