Wednesday, July 8, 2020

जानिए कब है देवशयनी एकादशी, विवाह समेत अन्य मांगलिक कामों पर लॉकडाउन रहेगा या नहीं ?

देवशयनी एकादशी इस बार एक जुलाई को पड़ रही है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। मान्यता के मुताबिक है कि इस तिथि से श्रीहरि चार मास तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस बार चातुर्मास की अवधि 148 दिन की रहेगी। 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को श्रीहरि योग निद्रा से जागेंगे।

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद: देवशयनी एकादशी इस बार एक जुलाई को पड़ रही है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। मान्यता के मुताबिक है कि इस तिथि से श्रीहरि चार मास तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस बार चातुर्मास की अवधि 148 दिन की रहेगी। 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को श्रीहरि योग निद्रा से जागेंगे।

अक्सर कई विद्वान चौमासे को लेकर चिंतित रहते है और कई बिंदुओं पर समाज को भ्रमित कर देते हैं। आमजन पूछता रह जाता हैं कि क्या अब चार महीने के लिए शादियों का लॉकडाउन आरंभ हो रहा है? मान्यता है कि इस चतुर्मास में विष्णु भगवान क्षीर सागर में निद्रा में चले जाते हैं और पृथ्वी पर इस दौरान कोई भी धार्मिक एवं विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। इसे श्री विष्णु शयनोत्सव भी कहा जाता है।

परंतु मुहूर्त चिंतामणि तथा पीयूषधारा जैसे ग्रंथों के अनुसार उत्तर भारत में लोकमान्यता अनुसार विवाहादि के मुहूर्त स्वीकार किए गए हैं। अतः पहली जुलाई से लेकर 25 नवंबर तक विवाह बंद नहीं होंगे और न ही कोई मांगलिक कार्य वर्जित होंगे। केवल श्राद्ध, आश्विन, कार्तिक तथा पौष महीनों के कुछ दिन छोड़ कर विवाह मुहूर्त प्रबल हैं। पहले ही कोरोना तथा लॉकडाउन के कारण जनसाधारण के अधिकांश कार्य रुके पड़े हैं। इसीलिए हम यहां क्रियात्मक रुप से होने वाली धार्मिक परंपराओं के पौराणिक तथा आधुनिक संदर्भों का विवेचन कर रहे हैं।

शुभ मुहूर्त…

देवशयनी एकादशी-1 जुलाई 2020 को

एकादशी तिथि प्रारम्भ- 30 जून 2020 को शाम 07:49 बजे

एकादशी तिथि समाप्त- 1 जुलाई 2020 को 05:29 बजे सायं

2 जुलाई को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय- 05:24 प्रातः से प्रातः08:13 बजे

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 03:16 बजे सायं

यदि आपको किसी कारण विवाह का अनुकूल मुहूर्त नहीं मिल रहा है तो आप शुभ दिनों में किसी रविवार को चुन सकते हैं और दिन में अभिजीत मुहूर्त में लगभग दोपहर 12 बजे के आसपास पाणिग्रहण संस्कार, आनंद कारज आदि संपन्न कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दिन का सर्वाधिक शुभ मुहूर्त माना जाता है।

सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:40 से 12:20 बजे के बीच होगा। यदि अभिजीत मुहूर्त में पूजन कर कोई भी शुभ मनोकामना की जाए तो वह निश्चित रूप से पूरी होती है।

नारदपुराण के अनुसार अभिजीत मुहूर्त यात्रा या शुभ काम के लिए घर से निकलने का शुभ काल होता है। अभिजीत मुहूर्त के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।

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