ऐसे पहचानें अपने बच्चे का हूनर और दें उसके सपनों को ऊंची उड़ान

यंगिस्तान | Nov. 14, 2017, 8:58 a.m.


नई दिल्ली (14 नवंबर): आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने में जुटे हैं। बच्चों पर अपेक्षाओं का बोझ इतना ज्यादा है कि वह अपने मन की बात मारने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में हर मां-बाप को समझना चाहिए कि किताबों से अलग भी एक दुनिया होती है, जो उनके बच्चों को बेहतर जिंदगी दे सकती है।

ऐसे में हर मां-बाप का फर्ज होना है कि वह अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचाने और उसी में उसका कैरियर बनाने में मदद करें। हालांकि कुछ मां-बाप को यह शिकायत हो सकती है कि वह अपने बच्चों के हूनर का पता नहीं लगा पाते तो ऐसे में न्यूज 24 आपको बताएगा कि किस तरह से आप अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उनके सपनों को एक नई उड़ान दे सकते हैं।

ऐसे पहचानें...
अक्सर बच्चे हमेशा कुछ न कुछ नया करना चाहते हैं। किसी को पेंटिंग करना पसंद होता है तो कोई गाना गाना पसंद करता है। जिस में वो अपने आप को खुश रखना चाहता है। जैसे किसी में अपनी बात को खूबसूरत शब्दों में ढालने का हुनर होता है, तो कोई घर की बिगड़ी चीज फटाफट ठीक कर देता है। ऐसे में पेरेंट्स को उन्हें उनकी पसंद का काम करने की छूट देना चाहिए, जिसकी वजह से धीरे-धीरे बच्चे की रचनात्मकता बढ़ेगी। आपको अपने बच्चे के साथ उसकी हर एक्टिविटीज में साथ देना होगा ताकि वो खुश रहे।

उनके अंदर काम को किसी भी तरह से निपटाने की प्रवृत्ति पैदा होने लगती है। लेकिन अगर आप अपने बच्चे को किसी भी काम को उसके हिसाब से करने की छूट देती हैं, तो बच्चे के अंदर न केवल आत्मविश्वास आता है, बल्कि वह अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करके अपने काम को पूरी लगन से करता है। अगर आप अपने बच्चे को थोड़ी सी छूट देंगी, तो वह कुछ खास करने को प्रेरित होने के साथ-साथ पढ़ाई में भी अच्छा करेगा।

जो काम बच्चे को पसंद है वो करने दे...
छोटे से बच्चे पर अपनी पसंद ना थोपें। उसे वो काम करने दें, जो करना उसे पसंद है। अगर वो डांस क्लास या वॉलीबॉल की क्लास में नहीं जाना चाहता है, तो उसके दोस्त ऐसा कर रहे हैं, यह सोचकर आप उसे भी ऐसा करने के लिए मजबूर ना करें।

अगर उसका मन घर में बैठकर कलरिंग करने का है या फिर वह टीवी पर थोड़ी देर के लिए अपना पसंदीदा कार्टून देखना चाहता है, तो इसके लिए आप उसे मना ना करें। अगर आपके पास समय है, तो उसके साथ बैठकर वो काम करें, जिसमें उसे मजा आ रहा हो। उसे बातों-बातों में जिंदगी के बारे में अच्छी बातें बताएं।

इन बातों का रखें ध्यान...
बच्चे में किसी भी काम को रचनात्मक तरीके से करने की भावना तभी आएगी, जब उसके अंदर हार का डर नहीं होगा। पेरेंट्स के तौर पर यह आपका दायित्व है कि अपने बच्चे के अंदर सफलता और असफलता को लेकर सही सोच विकसित करें। अपने बच्चे के अंदर असफलता से भी सीखने का भाव भरें। अपने बच्चे को पूरा समय दें। भले ही आप कितनी भी व्यस्त क्यों ना हों, दिन का कुछ समय सिर्फ अपने बच्चे के लिए रखें। इस समय में आप उसके मन में उठने वाली जिज्ञासाओं को शांत करें। उसके छोटे-छोटे सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब दें। उसे अच्छी कहानियां सुनाएं, इससे आपके बच्चे की रचनात्मकता बढे़गी।

अपने बच्चे से इस बात की उम्मीद न करें कि वो किसी भी काम को एक ही समय में पूरा कर लेगा। उसे काम पूरा करने के लिए वक्त दें। अपने बच्चे के किसी काम की अवहेलना न करें। तुमने तो सारा खराब कर दिया जैसी बातें भूलकर भी ना करें। अगर कोई चीज खराब हो गई है, तो उससे कहें कि कोई बात नहीं, अगली बार ध्यान रखना।

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