कौन हैं लिंगायत और क्या हैं इनकी परंपराएं, खुद को क्यों मानते हैं हिंदुओं से अलग?

देश | March 20, 2018, 12:33 p.m.



नई दिल्ली (20 मार्च): कांग्रेस ने कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा दे दिया है। हालांकि अभी इस बारे में अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है। कर्नाटक सरकार ने नागमोहन समिति की सिफारिशों को स्टेट माइनॉरिटी कमीशन ऐक्ट की धारा 2डी के तहत मंजूर किया है।

लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। कर्नाटक की आबादी का 18 फीसदी लिंगायत हैं। वहीं महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी आबादी है।

कौन हैं लिंगायत
लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं। इन दोनों समुदायों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधार आंदोलन के स्वरूप हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व समाज सुधारक बसवन्ना ने किया था। बसवन्ना खुद ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। उन्होंने ब्राह्मणों के वर्चस्ववादी व्यवस्था का विरोध किया। वे जन्म आधारित व्यवस्था की जगह कर्म आधारित व्यवस्था में विश्वास करते थे। लिंगायत समाज पहले हिन्दू वैदिक धर्म का ही पालन करता था, लेकिन इसकी कुरीतियों को हटाने के लिए इस नए सम्प्रदाय की स्थापना की गई।

क्या हैं इनकी परंपराएं
लिंगायत सम्प्रदाय के लोग ना तो वेदों में विश्वास रखते हैं और ना ही मूर्ति पूजा में। लिंगायत हिंदुओं के भगवान शिव की पूजा नहीं करते, लेकिन भगवान को उचित आकार "इष्टलिंग" के रूप में पूजा करने का तरीका प्रदान करता है। इष्टलिंग अंडे के आकार की गेंदनुमा आकृति होती है, जिसे वे धागे से अपने शरीर पर बांधते हैं। लिंगायत इस इष्टलिंग को आंतरिक चेतना का प्रतीक मानते हैं। निराकार परमात्मा को मानव या प्राणियों के आकार में कल्पित न करके विश्व के आकार में इष्टलिंग की रचना की गई है।

पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं
लिंगायत पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं करते हैं। लिंगायतों का मानना है कि एक ही जीवन है और कोई भी अपने कर्मों से अपने जीवन को स्वर्ग और नरक बना सकता है।

लिंगायत में शवों को दफनाने की परंपरा
लिंगायत परंपरा में अंतिम संस्कार में शवों को दफनाया जाता है। लिंगायत परंपरा में मृत्यु के बाद शव को नहलाकर बिठा दिया जाता है। शव को कपड़े या लकड़ी के सहारे बांध जाता है। जब किसी लिंगायत का निधन होता है तो उसे सजा-धजाकर कुर्सी पर बिठाया जाता है और फिर कंधे पर उठाया जाता है। इसे विमान बांधना कहते हैं। कई जगहों पर लिंगायतों के अलग कब्रिस्तान होते हैं।

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