वाराणसी: एक ऐसा भवन जहां आते हैं लोग सिर्फ मरने

देश | Jan. 18, 2018, 9:03 a.m.

लखनऊ(18 जनवरी): वाराणसी दुनिया में मोक्ष प्राप्ति के लिए जानी जाती है। इस धर्मनगरी में एक ऐसा भवन है जहां लोग अपने परिजनों को लाते है जिससे कि मोक्ष की प्राप्ति हो। इस भवन में लोग सिर्फ मरने के लिए ही आते हैं। यहां पर 14 दिन गुजारना होता है। जी हां हम बात कर रहे हैं मुक्ति भवन की। इस भवन को चलाने वाले भैरोनाथ शुक्ला अब तक 14 हजार से ज्यादा लोगों की मौत देख चुके हैं।  

- काशी लाश मुक्ति भवन बनारस के गोदौलिया में बना हुआ है। भवन के मैनेजर भैरोनाथ शुक्ला है।

- भैरोनाथ ने ने बताया, ''1958 में डालमिया चैरिटबल ट्रस्ट के फाउंडर विष्णु हरी डालमिया ने इसे बनवाया था। डालम‍िया की दादी जेडिया देवी की इच्छा थी कि बाहर से मुक्ति की कामना लेकर आने वाले वृद्ध, असहाय लोगों के लिए बाबा विश्वनाथ की शरण और गंगा के पास एक भवन होना चाहिए। उन्हीं की याद में इसको बनाया गया।''

- ''भवन में 10 रूम बने हैं, जिसमें मोक्ष प्राप्त करने वाला अपनी मृत्यु तक यहां परिवार के साथ रहता है।''

- ''यहां मोक्ष प्राप्ति‍ के लिए आने वालों से कोई पैसा नहीं लिया जाता है। अगर कोई सक्षम है तो बिजली का बिल दे जाता है। यही नहीं अगर कोई असहाय है तो उसकी अंतिम क्रिया भी भवन की ओर से ही करवाई जाती है।''

- भवन के मंदिर में सुबह-शाम पूजा-पाठ और कथा के बाद 'राम' नाम का कीर्तन होता है।

- संस्था के पुजारी, मुक्ति लेने आए सभी लोगों के कमरे में जाकर 'राम' नाम का जाप सुनाते है और शंख ध्वनि सुनाते हैं।

- पूरे भवन स्पीकर लगे है, जिसपर हमेशा राम नाम का कीर्तन बजता रहता है, जिससे मुक्ति पाने वाले के कान में राम नाम जाता रहे।


 

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