दिल्ली में सबसे बड़ा सांसो का अस्पताल खुद बीमार, डॉक्टर चाहिए

देश | Nov. 14, 2017, 8:28 p.m.


राजीव रंजन, नई दिल्ली ( 14 नवंबर ): दिल्ली में सांस की बीमारी का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल सरदार बल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्युट खुद बीमार है। न्यूज 24 को मिली जानकारी के मुताबिक पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पल्मनरी विभाग यानि सांस के रोगों वाले विभाग में कुल तेरह पद स्वीकृत हैं जिसमें प्रोफेसर के 3, असोसिएट प्रोफेसर के 4 और असिस्टेन्ट प्रोफेसर के 6 पद हैं। लेकिन हैरत की बात है कि 13 डाक्टरों के बजाय सिर्फ दो डाक्टरों की बदौलत इस्टीट्यूट चल रहा है। इन दो प्रोफेसरों में भी एक डाॅ राजकुमार ही पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के कार्यवाहक निदेशक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। यानि मरीज देखने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी उन्ही के कंधों पर है।

इससे भी बड़ी बात कि पिछले ढाई साल से पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट कार्यवाहक डायरेक्टर ही चला रहे हैं। एक भी परमानेंट डायरेक्टर इंस्टीट्यूट को ढाई साल से नहीं मिला जो सीनियर मोस्ट डाक्टर होता है उसे डायरेक्टर बना दिया जाता है। मरीजों को देखने के लिए मेडिकल के छात्रों पर ही जिम्मदारी है और एक चौंकाने वाली बात कि एक डाॅक्टर पिछले आठ साल से मरीज देख रहा है, लेकिन उसे परमानेन्ट नहीं किया गया। पटेल चेस्ट के प्रशासन की जिम्मेदारी दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की है और इस्टीट्यूट को बजट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मिलता है।

हमने दिल्ली विश्वविद्यालय के वीसी और प्रो वीसी से इस मामले में जानकारी मांगी तो व्यस्तता का हवाला देकर वो हमारे सवालों का जवाब देने से इंकार कर गए। इस इस्टीट्यूट की आधारशिला सरदार पटेल ने खुद अपने हाथों से 1949 में रखी। बाद में इस बड़े संस्थान का नाम ही लौहपुरुष सरदार पटेल के नाम पर कर दिया गया। अगर सांस की बीमारी का पता करते करते न्यूज 24 यहां नहीं पहुंचता तो खुद डाक्टरों की बाट जो रहे संस्थान की बीमारी का पता भी न चलता जब गुजरात के चुनाव आते हैं तो सरदार पटेल पार्टियों को खूब याद आते हैं। बीजेपी कहती है कि सरदार का नाम कांग्रेस ने इतिहास के पन्नो से मिटा दिया। कांग्रेस कहती है कि हमने सोने के अक्षरों में लिखा। खुद सरदार पटेल के नाम पर बने इस इस्टीट्यूट की बदहाली बेकारी में बदल जाएगी ...इसके लिए दोनों जिम्मेदार हैं। 

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