अमेरिका में बड़ा आर्थिक संकट, सरकार ने की 'शटडाउन' की घोषणा

दुनिया | Jan. 20, 2018, 1:43 p.m.

नई दिल्ली ( 20 जनवरी ): अमेरिका में ट्रंप सरकार के सामने एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पांच साल में यह दूसरा मौका है, जब अमेरिका को इस समस्या का सामना करना पड़ा। अमेरिका एक बार फिर 'शटडाउन' की कगार पर है। 'शटडाउन' टालने के लिए अमेरिकी सरकार की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट ने संघीय सरकार को आर्थिक मदद प्रदान करने वाले विधेयक को मंजूरी नहीं दी है। हालांकि निचले सदन प्रतिनिध सभा ने इसे गुरुवार रात को पारित कर दिया था। 

बताया जा रहा है कि सरकारी खर्चों को लेकर लाए गए महत्वपूर्ण आर्थिक विधेयक को अमेरिकन पार्लियामेंट की मंजूरी नहीं मिल पाई है, जिस कारण सरकार को 'शटडाउन' की घोषणा करनी पड़ी। अमेरिकी सीनेट के फैसले ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार को आंशिक और अनिश्चित बंद का धक्का दिया है। क्योंकि ऐसे स्थिति में आर्थिक मंजूरी के अभाव में देश में सरकारी कामकाज ठप हो जाएगा। यह समस्या ऐसे समय पर आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल को एक साल पूरा हो गया है। वहीं डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन इस समस्या के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

शुक्रवार की रात को रिपब्लिकन द्वारा पेश किए गए बजट प्रस्ताव के पक्ष में समर्थन में ज्यादा वोट मिले, लेकिन वे पर्याप्त नहीं थे। बजट प्रस्ताव के समर्थन में 50 वोट पड़े बल्कि खिलाफ 48 वोट थे। लेकिन ये संख्या फंड को स्वीकार करने के लिए अपर्याप्त थी, जिन्हें 60 सीनेटर्स के समर्थन की आवश्यकता थी।

बता दें कि अमेरिका में एंटी डेफिशिएंसी एक्ट लागू है, जिसमें फंड की कमी होने पर संघीय एजेंसियों को अपना कामकाज रोकना पड़ता है। वहीं सरकार फंड की कमी पूरी करने के लिए एक स्टॉप गैप डील लाती, जिसे अमेरिका की प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में पारित कराना जरूरी होता है। यह बिल अमेरिका की प्रतिनिधि सभा से तो पारित हो गया था, लेकिन सीनेट में इस पर चर्चा के दौरान ही रात के 12 बज गए और इस कारण यह बिल अटक गया। राष्ट्रपति ट्रंप के ऑफिस ने इसे लेकर जारी बयान में डेमोक्रेक्ट्स सांसदों को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। 

इस शटडाउन का असर सोमवार से देखने को मिलेगा, जब कई विभागों के कर्मचारी अपने काम पर नहीं जा पाएंगे और उन्हें बगैर पगार के ही घर पर बैठना होगा। एक अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों को घर बैठने पर मजबूर होना पड़ सकता है। सिर्फ अति आवश्यक सेवाओं को ही चालू रखा जाएगा। 

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