दुखों को दूर भगाने और सुख-सौभाग्य के लिए ऐसे करें तुलसी विवाह !

देश | Oct. 31, 2017, 6:29 a.m.

नई दिल्ली (31 अक्टूबर): भारतीय संस्कृति में तुलसी को सौभाग्यदायिनी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इनकी पूजा से परिवार को सुख सौभाग्य की प्राप्ति के साथ ही भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। इसीलिए हर वैष्णव व गृहस्थ के घर में तुलसी का पौधा अवश्य होता है। 
भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा व शुभ कार्यों में तुलसी दल चढ़ाया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के साथ माता तुलसी का विवाह मनाया जाता है। तुलसी के पौधे और विष्णु जी के स्वरूप शालिग्राम के साथ विवाह कराया जाता है। कहा जाता है कि विवाह करवाने वाले लोगों का दाम्पत्य जीवन प्रेम से भर जाता है। 
तुलसी विवाह के दिन एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन तुलसी जी के साथ विष्णु की मूर्ति रखी जाती है। विष्णु की मूर्ति को पीले वस्त्र से सजाया जाता है। तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाया जाता है। तुलसी जी के पौधे पर चुनरी चढ़ाकर विवाह के रीति रिवाज पूरे होते हैं। इस शुभ दिन को तुलसी जी को अपनी कन्या के समान ही गोद लेने का विधान है ।
फेरे के समय पण्डित जी या यजमान तुलसी जी के गमले को लेकर और पण्डित जी या यजमान शालिग्राम प्रतिमा को लेकर फेरे साथ-साथ करते है।  

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