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'मस्जिद के नाम पर विदेशों से पैसा लेकर भारत में आतंक फैला रहे हैं धर्मगुरु'

नई दिल्ली (22 अगस्त): राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इस मामले में अहम बयान दिया है। शिया बोर्ड ने सोमवार को कहा कि 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बाबर सेनापति ने मंदिरों के बीच में मस्जिद का निर्माण कराया था और यहीं से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद की नींव रखी गई। बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने यहां एक बयान में कहा, 'मीर बाकी बाबर की सेना का कमांडर था। वह शिया था और उसे हिंदुओं की भावनाओं के खिलाफ मुगल सेना का इस्तेमाल किया और 1528-29 में मंदिरों के बीच में एक बड़ी मस्जिद बनवाई। उसने झगड़े की जड़ पैदा करने का काम किया।'

रिजवी ने सोमवार को बयान में कहा, 'शिया वक्फ बोर्ड ने यह तय किया है कि आपसी समझौते से विवादित स्थल से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में एक मस्जिद का निर्माण कराया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड मस्जिद का नाम बाबर या फिर उसके कमांडर मीर बाकी के नाम पर नहीं रखेगा। उन्होंने कहा, 'बोर्ड चाहता है कि मस्जिद का नाम ऐसा हो कि सारे विवादों को ही समाप्त कर दे। नई मस्जिद का नाम मस्जिद-ए-अमन रखा जाएगा, जो देश में सौहार्द का संदेश देगी।'

रिजवी ने कहा, 'इराक और ईरान के शीर्ष मौलवियों ने भी राय दी है कि इस मामले में किसी भी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। इस मसले का समाधान बातचीत और दोस्ताना माहौल में होना चाहिए।' रिजवी ने कहा कि उस दौर में मीर बाकी की वजह से हिंदुओं और मुस्लिमों में विवाद हुआ और हजारों लोगों की जानें चली गईं। यही नहीं उन्होंने कहा, 'आज वहां मस्जिद नहीं है, लेकिन विदेशों से आतंकवाद फैलाने के लिए फंड हासिल करने वाले कुछ मुस्लिम धर्मगुरु इस्लाम की छवि को खराब कर रहे हैं।' रिजवी ने कहा कि मीर बाकी के 'बुरे कर्मों' का गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में भी उल्लेख किया है और उसे नीच बताया है।
 

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