छोटे शहरों से आए इन खिलाड़िय़ों ने क्रिकेट में किया बड़ा नाम

खेल | Nov. 14, 2017, 11:04 a.m.

नई दिल्ली (14 नवंबर): क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। पहले बड़े शहरों से आए खिलाड़ियों का टीम में बोलबाला रहता था, लेकिन समय के साथ-साथ कई ऐसे खिलाड़ी आए जो छोटे शहरों से थे। छोटे शहरों से आने के बावजूद इन खिलाड़ियों ने क्रिकेट की दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल किया।

इन खिलाड़ियों ने साबित किया की छोटे शहरों से होना कोई बुरी बात नहीं है, अगर हौसलों में दम और मेहनत करने की लगन हो तो हर चीज चीज हासिल की जा सकती है। इसी कड़ी में आज हम आपको 5 ऐसे क्रिकेटरों के बारे में बताने जा रहे हैं जो छोटे शहरों से होने के बावजूद क्रिकेट के इस खेल में अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं।

महेंद्र सिंह धोनी

भारत के छोटे से राज्य झारखंड की राजधानी रांची से आए महेन्द्र सिंह धोनी ने साल 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम में अपना सफर शुरू किया। साल 2007 में हुए विश्व टी-20 वर्ल्ड कप में उन्हें भारतीय टीम की कप्तानी मिल गई, जिसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। धोनी ने अपनी कप्तानी कौशल का पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया और क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट का विश्व टाइटल और वनडे वर्ल्ड कप भी भारत की झोली में डाल दिया।

हार्दिक पांड्या
भारतीय टीम के सबसे चहेते खिलाड़ी बन चुके हार्दिक पांड्या बतौर आलराउंडर टीम के लिए खेलते हैं। साल 1999 में पांड्या की फैमली सूरत से वडोदरा शिफ्ट हुई। पांड्या ने 5 साल की उम्र में किक्रेट अकादमी ज्वाइन की। उस समय उनके परिवार की स्थिति भी ठीक नहीं थी, लेकिन छोटे शहर के हार्दिक के सपने बड़े थे। अपनी मेहनत और लगन के बलबूते आज वह टीम इंडिया के महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुके हैं।

भुवनेश्वर कुमार

स्विंग बोलिंग के महारथी भुवनेश्वर कुमार मेरठ, यूपी के आम परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मेरठ के ही अपने साथी खिलाड़ी प्रवीण कुमार से उन्होंने बोलिंग के गुर सीखे। भुवनेश्वर के पिता और उनकी बहन ने क्रिकेटर बनने में उनका बहुत साथ दिया। उनके पिता हमेशा चाहते थे कि उनका भुवी क्रिकेट में ही नाम कमाए।

2009 में फर्स्ट क्लास मैच में जब उन्होंने सचिन तेंडुलकर को 0 पर आउट किया तब वे सुर्खियों में छाए। इसके बाद जल्द ही उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका मिला और आज भुवी ने अपनी जगह टीम में पक्की कर ली।

मोहम्मद शमी

अपनी सटीक लाइन लेंथ से दुनिया भर के बैट्समैन की नाक में दम कर देने वाले भारत के एक और फास्ट उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में रहने वाले हैं। शमी ने भी गरीबी को हराकर आगे बढ़े हैं। शमी के पिता ने उनकी बोलिंग स्पीड देखकर उन्हें पश्चिम बंगाल भेज दिया।

16 साल की उम्र में शमी कोलकाता जैसे अनजान शहर में आ गए और यहां पर उन्होंने नेट और क्रिकेट बॉल से अपनी दोस्ती और गहरी कर ली। शमी की प्रतिभा देखकर शहर के एक नामचीन क्लब में वह 75000 सालाना कॉन्ट्रैक्ट पर खेलने लगे। इसके बाद बंगाल की रणजी टीम से सफर तय करते हुए वह अपनी मंजिल टीम इंडिया में पहुंचे।

कुलदीप यादव

कानपुर (उत्तर प्रदेश) के इस बाएं हाथ के अनोखे स्पिनर ने पिछले कुछ महीनों में जब-जब मैदान पर कदम रखा, तब-तब खलबली मचाई। फिर चाहे वो टेस्ट क्रिकेट हो या फिर सीमित ओवर के प्रारूप। उम्र बेशक 22 साल है लेकिन 22 गज की पिच पर उनका मनोबल किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं नजर आ रहा है। हाल ही में कुलदीप एकदिवसीय में भारत के लिये हैट्रिक लेने वाले तीसरे गेंदबाज बने।

Related news

Don’t miss out

News