''कांग्रेस ने याकूब की फांसी का विरोध करने वाले को बनाया उपराष्ट्रपति कैंडिडेट''

देश | July 17, 2017, 1:29 p.m.


नई दिल्ली (17 जुलाई): आज देश में 14वें राष्ट्रपति के लिए वोटिंग हो रही है, ऐसे में केंद्र में सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने उपराष्ट्रपति चुनावों से पहले कांग्रेस पर निशाना साधा है। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस ने ऐसे शख्स को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, जिसने याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था।

संजय राउत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गोपालकृष्ण गांधी ने 1993 मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था। उन्होंने याकूब को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। ऐसे शख्स को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना आपकी कौन-सी मानसिकता दिखाता है। क्या इन्हें उपराष्ट्रपति बनाना चाहते हैं?''

राउत ने आगे कहा, ''हम विरोध नहीं करते, लेकिन जब देशहित और राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है, तब करना पड़ता है। याकूब ने पाकिस्तान के साथ मिलकर आतंकी हमले को अंजाम दिया। गोपालकृष्ण ने उसी याकूब को बचाने के लिए चलाई गई मुहिम को लीड किया। फांसी की सजा रद्द कराने के लिए राष्ट्रपति को लेटर लिखा।''

कांग्रेस बोली- शिवसेना सबूत दे...
इसपर कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा है कि गोपालकृष्ण गांधी पर सवाल उठाने से पहले शिवसेना इस बात की जानकारी दे कि उन्होंने फांसी रोकने के लिए क्या किया था।

कौन हैं गोपालकृष्ण गांधी?
- 71 साल के गोपाल कृष्ण गांधी का जन्म 22 अप्रैल 1946 को हुआ। उनके पिता देवदास बापू और कस्तूरबा गांधी के सबसे छोटे बेटे थे। मां का नाम लक्ष्मी था और वो फ्रीडम फाइटर तथा कांग्रेस के सीनियर लीडर सी. राजगोपालाचारी की बेटी थीं।
- गोपालकृष्ण 1968 में आईएएस बने। 2004 से 2009 के बीच वो वेस्ट बंगाल के गवर्नर रहे। ये वो दौर था जब 294 मेंबर्स वाली असेंबली में अकेले लेफ्ट के 235 विधायक थे। इसी दौरान बंगाल में सिंगूर और नंदीग्राम जैसे हिंसक आंदोलन हुए।
- 2008 में जब सिंगूर हिंसा की आग में जल रहा था तब गोपालकृष्ण गांधी ही थे जिन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता को बातचीत के लिए राजी किया। लेफ्ट की ताकत बंगाल में कम होती गई और ममता बनर्जी नई ताकत के तौर पर सामने आईं।
- गांधी सेंट स्टीफंस कॉलेज से निकले हैं। आईएएस बनने के बाद 80 के दशक तक वो तमिलनाडु में तैनात रहे। 1985 से 1987 तक वो वाइस प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी रहे। अगले पांच साल तक वो प्रेसिडेंट के ज्वॉइंट सेक्रेटरी रहे।
- 1992 से 2003 तक वो कई डिप्लोमैटिक पोस्ट्स पर रहे। 1996 में साउथ अफ्रीका में इंडियन हाईकमिश्नर, 1997 से 2000 तक प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी, 2000 में श्रीलंका में हाईकमिश्नर रहे। 2002 के बाद गांधी नॉर्वे और आयरलैंड में एम्बेसडर रहे।

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