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अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति स्थापित करने में सहयोग करना चाहता है शिया वक्फ बोर्ड

नई दिल्ली (13 अक्टूबर): अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करने में शिया वक़्फ़ बोर्ड मदद करना चाहता है। शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने बयान जारी कर कहा है कि गंगा-जमुनी सभ्यता को कायम रखते हुए शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या में बनने वाले भव्य भगवान राम की मूर्ति में सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि अवध प्रान्त में चार सौ साल से गंगा-जमुनी तहज़ीब का दौर शिया समाज और हिन्दू समाज के बीच जारी रहा है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की तरफ से अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति जोकि एशिया मे सबसे बड़ी मूर्ति होगी, लगाये जाने का सरकार का निर्णय सराहनीय है। इससे प्रदेश का गौरव पूरे विश्व में बढ़ेगा। ऐसे अच्छे काम के लिए शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड का अगर कोई सहयोग सरकार चाहेगी तो बोर्ड इस मामले में भी पूरा सहयोग करेगा।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में अवध के नवाबों की हुकूमत में वहां के स्थित मन्दिरों का सम्मान किया गया। नवाब शुजाउद्दौला ने हनुमान गढ़ी मन्दिर के लिए वर्ष 1739 से 1754 के मध्य अयोध्या स्थित भूमि दी थी जिसके बाद नवाब आसिफुद्दौला द्वारा 1775 से 1793 के मध्य में हनुमान गढ़ी मन्दिर निर्माण हेतु फण्ड भी दिये गये जोकि अवध के इतिहास की किताबों में उल्लिखित है।  

एक और मंदिर मस्जिद के विवाद का दावा करते हुए वसीम ने कहा कि बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि विवाद की तरह का एक विवाद नवाब वाजिद अली शाह के समय में भी अयोध्या में जन्मा था। कुछ मुसलमानों ने नवाब वाजिद अली शाह से आकर कहा कि मन्दिर के पास एक मस्जिद थी जिसको हिन्दुओं ने तोड़ दिया है और जिसमें सौ लोग मार दिये गये हैं। नवाब वाजिद अली शाह ने तीन लोगों की एक कमेटी बना कर प्रकरण की जांच के लिए भेजा जिसमें एक मुसलमान था, एक हिन्दु था और एक क्रिश्चियन था। उक्त कमेटी ने मुसलमानों के इल्ज़ामात को गलत बताते हुए अपनी रिपोर्ट दी, उसके बाद भी मौलवी अमीर अली नाम का एक कट्टरपंथी वहां पर मस्जिद बनाये जाने के लिए अड़ा रहा जिस पर नवाब वाजिद अली शाह द्वारा मुजतहिद सय्यद मोहम्मद नसीराबादी और फ़िरंगी महल से फ़तवा लिया जिसमें यह कहा गया कि विवादित स्थल पर मस्जिद बनाया जाना इस्लाम के सिद्धान्तों के विपरीत है। नवाब वाजिद अली शाह की फ़ौज ने विवाद उत्पन्न कर रहे मौलवी अमीर अली को रूदौली के निकट क़त्ल कर दिया जिसके बाद यह विवाद खत्म हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रहित में यह जरूरी है कि जो लोग देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त हैं उनसे सख़्ती से ही निपटा जाये। शिया वक्फ बोर्ड राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद प्रकरण में आपसी समझौते से प्रकरण का निस्तारण करने के लिए सक्रिय है। बोर्ड ने इस संबंध में सभी आवश्यक पक्षकारों से बात भी कर ली है। माननीय उच्चतम न्यायालय में बोर्ड अपनी बात रख चुका है। बोर्ड को यह उम्मीद है कि राम मन्दिर का निर्माण राम जन्म भूमि पर आपसी समझौते से वर्ष 2018 में शुरू हो जायेगा।

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