'धरती को सकता है भारी नुकसान, बचाने के लिए कम समय'

देश | Nov. 15, 2017, 8:16 a.m.

नई दिल्ली(15 नवंबर): धरती को बचाने के लिए बहुत कम वक्त रह गया है। यह चेतावनी वैज्ञानिकों के सबसे बड़े समूह ने दी है और कहा है कि अगर फौरन कुछ न किया गया तो पृथ्वी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

- बुधवार को दुनिया के 184 देशों के करीब 15 हजार वैज्ञानिकों ने बायॉसाइंस जनरल के आर्टिकल 'वर्ल्ड साइंटिस्ट वॉर्निंग टु ह्यूमैनिटी: अ सेकंड नोटिस' पर दस्तखत किया। 

- धरती को लेकर यह अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन था जिसमें दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने शिरकत की। प्रफेसर विलियम रिपल ने बायॉसाइंस के आर्टिकल में लिखा है कि धरती को बचाने का दूसरा नोटिस लोगों को दे दिया गया है। इसके लिए हमें अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या को भी बदलना होगा।

- वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी से जुड़ी कई चुनौतियों जैसे पेड़ों की कटाई, ओज़ोन लेयर में छेद, मौसम के बदलाव आदि के बारे में 25 साल पहले ही चेतावनी दे दी गई थी। आज जब इन चुनौतियों का अध्ययन किया गया तो पता चला कि अब हालात और खराब हो चुके हैं। ताजे पानी में 26 फीसदी की गिरावट आई है और 300 मिलियन एकड़ जंगलों का सफाया किया जा चुका है। इन 25 वर्षों में स्तनधारी जीवों, पक्षियों आदि में 29 फीसदी की गिरावट देखी गई है। साथ ही महासागरों के डेड ज़ोन में 75 फीसदी की बढ़त हो चुकी है।

- रीसर्च आर्टिकल के मुताबिक हालात खतरनाक हैं लेकिन इसे अभी भी ठीक किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि अगर आबादी को रोकने के कदम उठाए जाएं, मांसाहारी खाने की जगह शाकाहारी खाने की आदत डाली जाए और सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाए तो अभी भी इस नुकसान को रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 9 में से सिर्फ एक जगह ओज़ोन लेयर की स्थिति बेहतर हुई है। इसे और ठीक किए जाने की जरूरत है और इसके लिए मीडिया, प्रफेसरों और सामाजिक संगठनों को आगे आना होगा।
 

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