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काशी पहुंचे संजय दत्त, 12 साल बाद किया पिता का पिंडदान

नई दिल्ली(13 सितंबर): पितृपक्ष पर वाराणसी में फिल्म अभिनेता संजय दत्त अपने पूर्वजों का पिंडदान करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा की ये उनके पिताजी की इच्छा थी।

-पुराणों में लिखा है कि काशी में जो मरता है उसे इस संसार के आवागमन से मुक्ति मिल जाती है। जिसकी यहां मृत्यु नहीं होती लेकिन यदि उनका पिण्डदान यहां किया जाता है तो उन्हें भी मुक्ति मिल जाती है। ऐसी भावना लिए पितृपक्ष में लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए यहां आते हैं और गंगा पूजन कर उनके मोक्ष की मनोकामना करते हैं। गंगा तट पर किया गया श्राद्ध का महत्व अपने आप ही बढ़ जाता है। 

- ऐसी ही कामना लिए संजय दत्त भी अपने पूर्वज पिता-माता, दादा-दादी, नाना-नानी का श्राद करने बनारस के रानीघाट पहुंचे, यहां विधि विधान से उन्होंने पिंडदान किया।

-  इस दौरान जिन पंडितो ने संजय दत्त के साथ मिलकर उनके पूर्वजों के पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की, उन्होंने बताया की पिंडदान के साथ-साथ संजू बाबा ने शंखनाथ गंगा आरती कर, अपनी आने वाले फिल्म 'भूमि' के लिए भी आशीर्वाद मांगा।

- संजय दत्त ने वाराणसी में पिंडदान करने के बाद कहा, "पिता जी ने कहा था कि आजाद हो जाना तो पिंडदान कर देना, इसलिए बनारस आया हूं। बहुत जरुरी था आना।" 

- बता दें, संजय के पिता और दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त का निधन 2005 में हुआ था। पिता की मृत्यु के 12 साल बाद संजय पिंडदान करने आए। 

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