अगर जज मामला नहीं सुलझा पाएं तो राष्ट्रपति को दखल देना चाहिए: डीएमके

देश | Jan. 13, 2018, 5:36 p.m.

नई दिल्ली(13 जनवरी): सुप्रीम कोर्ट के जज अगर मामला नहीं सुलझा पाते हैं तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दखल देना चाहिए। यह कहना है डीएमके का। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के स्टालिन ने कहा कि अगर जज मामले को नहीं सुलझा पाते हैं तो राष्ट्रपति को दखल देना चाहिए और मामले का हल निकालना चाहिए। लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों को बातचीत करना चाहिए। 

-आपको बता दें कि शुक्रवार सुबह देश में पहली बार न्यायपालिका में असाधारण स्थिति देखी गई। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया। चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। 

-उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। 

-चारों जजों ने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। हमने चीफ जस्टिस से अनियमितताओं पर बात की। उन्होंने बताया कि चार महीने पहले हम सभी चार जजों ने चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जो कि प्रशासन के बारे में थे, हमने कुछ मुद्दे उठाए थे। चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं। 
 

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