कश्मीर पर पाकिस्तान के बदले सुर, पाक आर्मी चीफ बोले- बातचीत से हल हो सारे विवाद

दुनिया | April 16, 2018, 9:30 a.m.


नई दिल्ली ( 16 अप्रैल ): भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा हो या आतंकवाद ऐसे कई मुद्दे हैं जिनको लेकर दोनों देशों के रिश्ते तल्ख हैं। लेकिन लंब समय से कड़वी भाषा बोल रहे पाकिस्तान के सुर ढीले नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ के हालिया बयान से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 

पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के विवादित मुद्दों, जिनमें कश्मीर मुद्दा भी शामिल है, को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। पाक आर्मी चीफ का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद और कश्मीर मुद्दे को लेकर पाक को मुंह की खानी पड़ी है। ऐसे में बाजवा के इस बयान को कश्मीर मुद्दे पर नरम पड़े सुर के तौर पर देखा जा रहा है।

बाजवा ने कहा, 'मेरा गंभीर रूप से मानना है कि भारत-पाक विवाद के समाधान का रास्ता शांतिपूर्ण और समग्र बातचीत से होकर निकलता है, जिसमें कश्मीर का मुख्य मुद्दा भी शामिल है।' बाजवा ने कहा, 'हालांकि इससे किसी पक्ष को फायदा नहीं होता, लेकिन यह इस क्षेत्र में शांति के लिए सबसे जरूरी कदम है। 

पाकिस्तान ऐसी बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसका आधार संप्रभुता का सम्मान और बराबरी की भावना पर आधारित होना चाहिए। 'बाजवा ने कहा कि पाकिस्तान शांति प्रेमी देश है और वह सभी देशों के साथ, विशेषकर पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह अस्तित्व चाहता है। उन्होंने कहा, 'हालांकि बातचीत की इस इच्छा को कमजोरी के किसी संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हमारी बहादुर सेना किसी भी खतरे का पूरी ताकत से जवाब देने का माद्दा रखती है।'

पाक आर्मी चीफ ने कहा कि उनका देश जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय की मांग के अधिकार का पूरी तरह से राजनीतिक और नैतिक समर्थन करता है। बाजवा ने कहा कि पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है और सभी देशों के साथ सामंजस्य और शांतिपूर्ण सहयोग चाहता है, खास तौर पर अपने पड़ोसी देशों के साथ। उन्होंने कहा, 'हालांकि शांति की इस इच्छा को किसी भी सूरत में कमजोरी का प्रतीक नहीं समझा जाना चाहिए। 

हमारी सेनाएं किसी भी परिस्थिति से निपटने और उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।' उन्होंने कहा, 'हालांकि यह बातचीत किसी एक पक्ष के लिए नहीं है, लेकिन यह पूरे क्षेत्र में शांति की अनिवार्यता जरूरी है। पाकिस्तान इस तरह की बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सिर्फ सार्वभौम समानता और सम्मान के आधार पर।' 
 

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