ऐसे करें भगवान शिव की अराधना, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

देश | Feb. 13, 2018, 4:26 a.m.


नई दिल्ली (13 फरवरी): ऐसे भोलेभंडारी की अराधना हर वक्त कल्याणकारी माना जाता है। लेकिन खास मौकों पर खास तरीके से शिव की पूजा ज्यादा फलदायक होता है। लिहाजा इस साल भी शिवरात्री के शुभ मुहुर्त और पूजा विधि को लेकर लोगों में खास जिज्ञासा देखी जा रही है। कई जगहों पर महाशिवरात्रि का पर्व आज मनाया जा रहा है तो कई जगहों पर कल यानी 14 फरवरी को।

मान्यता के मुताबिक इसी दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ था। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन से जुड़ी एक और मान्यता है। बताया जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था, जो समुद्र मंथन के दौरान बाहर आया था। इस विशेष दिन पर सही समय और सही विधि से पूजा कर आप भी भगवान शिव का आशीर्वाद पा सकते हैं। 

पूजा का शुभ मुहूर्त...

इस बार शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त आज रात 11:34 बजे से लेकर 14 फरवरी को रात 12:47 तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र 14 फरवरी की सुबह शुरू होगा, ऐसे में इसी दिन शिवरात्रि मनाना शुभ रहेगा। बुधवार सुबह 7 बजे से पूजा का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद सुबह 11:15, दोपहर 3:30 बजे पूजा के लिए शुभ है। शाम के लिए 5:15 बजे का समय लाभकारी है। रात के समय 8 बजे और 9:31 बजे का समय अत्यंत शुभ है।
चार प्रहर पूजन का समय गोधूलि बेला से प्रारंभ कर के ब्रह्म मुहूर्त तक करना चाहिए। चार प्रहर में यदि पूजा करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप पूजा किसी पंडित से करवाएं ताकि पूजा विधि में कोई गलती न हो और आपको इसका लाभकारी फल मिल सके। ऐसा करना जातक के लिए सबसे उत्तम होगा।

पूजा की विधि...

- सबसे पहले जल से प्रोक्षणी करके अपने ऊपर जल छिड़कें

- मंत्र : ऊं अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाम् गतो पि वा. य: स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स वाह्याभ्यन्तर: शुचि:.

- 3 बार आचमन करके हाथ धो लें

- आचमन मंत्र: ऊं केशवाय नमः, ऊं माधवाय नमः, ऊं गोविंदाय नमः

- हाथ धोने का मंत्र: ऊं ऋषि केशाय नमः हस्तो प्रक्षालपम

- अब स्वस्तिवाचन करें

- स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु

- इसके बाद दीपक प्रज्वलित करें

पूजा में इन 7 सामान को जरूर करें शामिल

- शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक
- बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं
- सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है
- फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं
- जलती धूप, धन, उपज (अनाज)
- दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है
- पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं

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