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दिवालिया हुआ JP बिल्डर, ग्राहकों को कैसे वापस मिलेगा पैसा ?

नई दिल्ली (11 जुलाई): नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जेपी बिल्डर को दिवालिया घोषित कर दिया है। कंपनी पर 8 हजार 365 करोड़ रुपए का कर्ज है। अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल को जेपी इंफ्राटेक कंपनी के पक्ष का इंतजार है, जिन्हें 270 दिनों का वक्त मिलेगा। अगर 270 दिनों में उन्होंने अपनी स्थिति सुधार ली तो ठीक है, वरना कंपनी की तमाम प्रॉपर्टी की नीलामी हो सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा मुश्किलें उन 32 हजार लोगों की बढ़ गई है जिन्होंने घर के लिए अपनी पूरी जिंदगी का पैसा लगा दिया है। जेपी के दिवालिया घोषित होने से कंपनी के साथ-साथ घर खरीदने वाले भी दिक्कत में पड़ सकते हैं। 


ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच ने आईडीबीआई बैंक की याचिका को स्वीकार किया और जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित कर दिया। इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड के तहत जब एनसीएलटी में कोई केस स्वीकृत हो जाता है, उसके बाद 180 दिनों के अंदर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारनी होती है। इस अवधि को 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। अगर इसके बाद भी कंपनी की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती को कंपनी के असेट्स को नीलाम कर दिया जाएगा।

JP इंफ्राटेक के बायर्स के सामने विकल्प...

- बायर्स को अब अपना पैसा वापसी के लिए क्लेम करना होगा

- उन बायर्स की परेशानी ज्यादा है जिन्होंने पैसे कंपनी को दिए लेकिन वो बैंक प्रोसेस में नहीं आए यानी होमलोन के जरिये फ्लैट बुक नहीं कराया

- बैंक लोन जिनका हो चुका है, और प्रोजेक्ट कंप्लीट है उनको ज़्यादा परेशानी नहीं होगी

- जिन्होंने हाल ही में प्रोजेक्ट में पैसा लगाकर फ्लैट बुक कराया है, वो रकम वापसी के लिए जल्द अपील करें

- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने अनुज जैन को इंसोल्वेंसी प्रोफ़ेशनल को नियुक्त किया

- घर खरीदार दो हफ्ते के भीतर अपने प्लाट या फ्लैट के एवज में क्लेम कर सकते हैं
 
- जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की श्रेणी में डालने के बाद ये मामला ये रियल सेक्टर के लिए मॉडल केस बनेगा, जब कई रियल एस्टेट कंपनी
दिवालिया होने की कगार पर हैं

- यहां तीन पक्ष हैं, बिल्डर, बैंक और ग्राहक

- 32,000 की संख्या में फ्लैट बुक कराने वालों का क्या होता है
 
- Rera और Insolvency code के बाद क्या बायर्स का हित का खयाल कैसे रखा जाएगा

- जेपी इंफ्राटेक को पहले 180 दिन उसके बाद 90 दिन यानी कुल 9 महीने का समय मिलेंगे खुद को पूरी तरह दिवालिया घोषित होने से बचाने के लिए

- अगर कंपनी वितीय संकट से बाहर नहीं निकली तो उसे पूरी तरह से दिवालिया घोषित करते हुए उसकी संपत्तियों के नीलामी की प्रक्रिया शुरू करके बैंकों को पैसा लौटने की प्रक्रिया शुरू होगी

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