क्राइम शो 'जाल' बताएगा डार्क वेब का उपयोग कैसे करते हैं साइबर क्रिमिनल्स

देश | April 3, 2018, 10:49 a.m.

नई दिल्ली (11 अप्रैल): इंटरनेट के तीन पहलू हैं, एक जिससे सरफेस वेब कहा जाता है यानि की सर्च इंजिन्स, इमेल्स, सोशल मीडिया नेटवर्क, वीडियो, वेबसाइट्स इत्यादि। जहां आमतौर पर लोग जाते हैं, जानकारी शेयर करते हैं और इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस के ज़रिए सरफेस वेब को इस्तेमाल करने वालों की वहां जानकारी स्टोर हो जाती है। इन सारे वेबसाइट्स की इंडेक्स मौजूद होती है। इसके अंतर्गत तकरीबन 4.5 अरब पेजेज आते हैं।

सुनने में ऐसा लगता है, जैसे यह काफी ज़्यादा हैं। मगर असलियत में इंटरनेट का ये मात्र 10% हिस्सा है। बाकि का 90% हिस्सा डीप वेब या डार्क नेट का हिस्सा है, जहां जाने वाले लोगों की पहचान मॉर्फ़ या छुपाई जा सकती है और उनके IP Address का पता लगाना असंभव है। डीप वेब या डार्क नेट कुछ खास एन्क्रिप्टेड, सॉफ्टवर्स के ज़रिए ही जाया जा सकता है। जहां हर जानकारी और पहचान गुप्त रहता है। साइबर क्राइम का यही हिस्सा चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसी डीप वेब और डार्क नेट पर सारे काले कारनामो को अंजाम दिया जाता है। जैसे ड्रग्स, गैर-कानूनी हथियार की खरीद फरोख्त, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अंग व्यापर, सुपारी देना और आतंकवादी गतिविधियों की जानकारी का आदान प्रदान।

सबसे अहम बात यह है कि डार्क वेब कि सभी लेन देन 'बिटकॉइन' नामक डिजिटल क्रिप्टो करेंसी से की जाती है, जो किसी भी देश की सीमा का आधीन नहीं है। ग्राहक के लिए पूरी तरह गुप्तता प्रदान करता है और किसी सरकार या स्टेट के अंदर अधिकृत नहीं है। डार्क नेट सिर्फ गैर-कानूनी धंधे के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता बल्कि इंटेलिजेंस, whistleblowing, राजनैतिक जानकारी शेयर करना, दुर्लभ किताबें और रिसर्च के लिए भी लोग पहचान छुपा कर डार्क नेट का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक की फेसबुक ने भी कुछ साल पहले अपने साइट को डार्क नेट पर उपलब्ध करा दिया है, जिससे कि लोगों कि गुप्तता बनी रहे।

सबसे मज़ेदार बात यह है कि इस डार्क नेट को अमेरिका के मिलिट्री डिपार्टमेंट ने शुरू किया था। 90 के दशक में अपने कुछ ख़ुफ़िया जानकारी और विवरण के आदान प्रदान के लिए। जहां उन्होंने खास सॉफ्टवेयर बनवाए जैसे TOR और फिर उससे पब्लिक डोमेन पर डाल दाल दिया गया। नतीजा, साइबर क्रिमिनल्स को एक ऐसा मंच मिल गया, जिसके द्वारा वो हर उस जुर्म को अंजाम देने में सक्षम हो गए, जहां उन्हें अपनी पहचान बिना उजागर किए बड़े से बड़े अपराध को आसानी से करने का मौका मिल गया।

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