इजरायल के ये 4 चमत्कार, जिससे दुनिया है हैरान

दुनिया | Jan. 14, 2018, 2:19 p.m.

नई दिल्ली (14 जनवरी): अरब देशों के बीच बसा इज़रायल हिंदुस्तान के मेज़ोरम से भी छोटा है। इस मुल्क की आबादी उत्तर प्रदेश की आबादी से भी आधी है, लेकिन कृषि से लेकर डिफेंस फील्ड तक में इज़रायल ने ऐसे ऐसे चमत्कार किए, जिससे पूरी दुनिया हैरान है।

हम आपको इज़रायल के उस टैक्नॉलोजी के बारे में बताते हैं जो बड़े-बड़े मुल्कों के पास नहीं है...

पता लगा लेता है पेड़ की प्यास...

इज़रायल दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो पिछले चार साल से इस बात का पता लगाने में कामयाब रहा है कि पेड़ पौधों को कितनी प्यास लगती है। कब पेड़ को पानी की ज़रूरत है। कितने पानी से उसकी प्यास बुझ सकती है। इज़रायल ने पेड़ों में सेंसर लगा रखा है, जो रिमोट से कंट्रोल होते हैं। ये तकनीक पेड़ों की प्यास को माप देती है। इसका पता लगाने के बाद इज़रायल पेड़ को उतना ही पानी देता है, जितनी उसकी ज़रूरत होती है।

ओस से बनाता है पानी...

इतना ही नहीं ओस से इज़रायल पानी भी बना लेता है। इज़रायल ऐसी तकनीक से लैस है कि जो ओस से पानी बनाने में भी सक्षम है। जब भी पानी की किल्लत होती है, वो ओस को पानी में बदल देता है और इसी पानी से पौधों कि सिंचाई और पेड़ पर पानी की छिड़काव कर देता है यानि दूसरे मुल्कों की तरह इज़रायल को पानी के लिए सिर्फ बारिश के मौसम पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

रेगिस्तान में खेती...

तकनीक के मुद्दे पर दुनिया में कोई भी इजरायल का सानी नहीं है, जिस रेगिस्तान में एक पौधा उगाना मुश्किल होता है उस रेगिस्तान में इज़रायल बरसों से खेती कर रहा है। अपनी आधुनिक तकनीकियों की बदौलत ही इजरायल के दक्षिण स्थित अरावा रेगिस्तान में कठिन जलवायु होने के बावजूद स्ट्रॉबेरी, आर्गन पेड़ और मछली का स्थायी उत्पादन कर रहा है।

अरावा एक रेगिस्तानी घाटी है जो डेड सी से लेकर रेड सागर तक फैली हुई है। कृषि के लिए ये क्षेत्र काफी चुनौती भरा है। यहां पानी की मात्रा भी अधिक नहीं है और तापमान भी काफी रहता है। ऐसे में यहां खेती का विकास आसान नहीं कहा जाता है, लेकिन इस जगह पर भी इजारयल ने खेती को संभव बना दिया है।

कृषि में सात गुना पैदावार...

इजरायल के कृषि उत्पादों में पिछले 25 साल में सात गुणा बढ़ोतरी हुई है, जबकि पानी का इस्तेमाल जितना किया जाता था, उतना ही अब भी किया जा रहा है। जो अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है। 1950 के दशक में इजरायली इंजीनियर और आविष्कारक ने पहली आधुनिक बूंद-बूंद सिंचाई तरीके का विकास किया था। जो पानी की कमी झेल रहे मध्य-पूर्व के देशों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण आविष्कार था। इसी के सहारे इज़रायल ने अपनी खेती को सात गुना बढ़ा दिया है। शायद इसीलिए दो दिन के दौरे पर गए पीएम मोदी इज़रायल के खेतों को भी देखेंगे और भारत में खेती की उस टैकनीक को बढ़ा देने के लिए समझौते भी हो सकते हैं। इससे पहले पीएम मोदी फ्लावर पार्क गए जहां उन्हें खास फूलों का एक पौधा भेंट किया गया, जिसका नाम इज़रायल ने मोदी रखा है।

Related news

Don’t miss out

News