इन 46 नर्सों जैसे खुशकिस्मत नहीं रहे 39 भारतीय मजदूर

देश | March 20, 2018, 1:37 p.m.


नई दिल्ली (20 मार्च): आतंकी संगठन आईएसआईएस के इराक पर कब्जा करने से पहले वहां पर दुनिया भर के लोग नौकरी करते थे। हालांकि आज राज्यसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि मोसुल में फंसे 39 भारतीय मजदूर अब जिंदा नहीं है, और उनके शवों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने आईएसआईएस के चुंगल में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया था, लेकिन कह सकते हैं कि यह मजदूर उन 46 नर्सों की तरह खुशकिस्मत नहीं थे जिनको सरकार इराक के तिकरित शहर से बचाकर सकुशल भारत लाया गया था। मोदी सरकार के लिए इन नर्सों को वापस लाना एक बड़ा ही चैलेंज था।

आईएसआईएस तिकरित से 46 भारतीय नर्सों को बाहर निकाल कर अज्ञात स्थान पर ले गए थे। जिसके बाद सरकार ने उनको बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था और मेहनत भी रंग लाई। 5 जुलाई 2014 को खबर आई कि बंधक बनाई गईं नर्सों को छोड़ दिया गया। इन नर्सों को आईएस के आतंकी अगवा करके अज्ञात जगह ले गए थे। इसके बाद इनकी रिहाई को लेकर सभी लोग नाउम्मीद हो चुके थे। लेकिन, अचानक भारतीय कोशिश रंग लाई और आतंकी नर्सों को कुर्द इलाके के बॉर्डर पर छोड़ने को तैयार हो गए। यहां से नर्सों को शुक्रवार को एरबिल लाया गया। एरबिल कुर्द लोगों का स्वायत्त इलाका कुर्दिस्तान की राजधानी है, यहां लड़ाई नहीं चल रही है। इसके बाद शाम को एयर इंडिया का विशेष विमान उन्हें लेकर भारत के लिए रवाना हो गया। विमान शनिवार की सुबह मुंबई पहुंचा।

ऐसे मुमकिन हुई रिहाई
नर्सों की रिहाई में सरकार के डिप्लोमैटिक लेवल पर किए गए प्रयासों से भी मदद मिली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि हमने हर दरवाजा खटखटाया था। उसी में से एक जगह बात बन गई। यह सब कैसे हुआ, फिर कभी बताएंगे।

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