बुलेट ट्रेन ही नहीं, बुलेट की रफ्तार से आगे बढ़ेगी भारत-जापान की दोस्ती

देश | Sept. 14, 2017, 4:33 a.m.

नई दिल्ली (14 सितंबर): भारत और जापान के संबंधों में बुलेट ट्रेन जैसी तेजी की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और पीएम नरेंद्र मोदी आज ऐसे कई मुद्दों पर ठोस बात करेंगे, जिनसे दोनों देशों की दोस्ती बढ़ेगी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव हो सकते हैं, ऐसे में यह यात्रा राजनीतिक तौर पर भी अहम है। दोनों नेता गुजरात के गांधीनगर में सालाना शिखर बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह ऐसी चौथी शिखर बैठक है। इस दौरान दोनों देश अपनी स्पेशल स्ट्रैटिजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप का विस्तार करने पर बातचीत करेंगे। 
- उत्तर कोरिया
भारत और जापान की सालाना बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का मुद्दा गरम है। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया उसके खिलाफ हैं और भारत ने भी उत्तर कोरिया के रुख की आलोचना की है। बता दें कि डोकलाम में जब भारत और चीन के बीच टकराव चला था तो जापान ने खुलकर भारत का समर्थन किया था। शिखर बैठक में क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर बात होगी।

- एटमी करार
दोनों देशों के बीच सिविल एटमी डील का करार लागू हो चुका है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि बैठक में इस करार को कैसे आगे ले जाया जाए, इस पर बात हो सकती है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर साइन नहीं किए हैं, फिर भी जापान परमाणु बिजली बनाने की तकनीक देगा। मुमकिन है कि पावर प्लांट के उपकरण मेक इन इंडिया के तहत बनाने पर भी बात हो। 

- एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर
दोनों देशों की सालाना बैठक में एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर का मुद्दा अहम होगा, जो चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रॉजेक्ट का जवाब माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया है कि इसके लिए कवायद जारी है। हम इस पर जापान और तीसरे देशों से गठजोड़ की उम्मीद रखते हैं और इसमें मैच्योरिटी आ रही है।

- रक्षा सहयोग
भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग प्राथमिकता का क्षेत्र बताया गया है। इसी महीने पूर्व रक्षा मंत्री अरुण जेटली जापान गए थे और उनकी वहां के रक्षा मंत्री से बातचीत हुई थी, जिसमें रक्षा सहयोग बढ़ने के संकेत मिले थे। भारत नेवी के लिए 12 समुद्री सर्विलांस विमान की डील फाइनल कर सकता है। ऊंची कीमत के कारण इस डील के पूरा होने का 7 साल से इंतजार है।

- समुद्री सहयोग
दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी बातचीत होने की उम्मीद है, क्योंकि इस मसले पर दोनों के हित जुड़े हुए हैं। हिंद महासागर और साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच दोनों देशों में सहयोग जरूरी माना जा रहा है। भारत और जापान ने अमेरिका के साथ मिलकर हाल में ही मालाबार सैन्य अभ्यास किया था और आगे इस अभ्यास के विस्तार की बात है। मुमकिन है कि अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को जोड़ने पर बात हो।

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