ये है कांग्रेस के 'हाथ' का इतिहास, ऐसे आया आस्तित्व में

देश | March 17, 2018, 12:27 p.m.

नई दिल्ली (17 मार्च): कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है। राजधानी दिल्ली में राहुल गांधी की अध्यक्षता में पार्टी का महाअधिवेशन मनाया जा रहा है। आज कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ है, लेकिन इससे पहले यह कभी दो बैलों की जोडी, कभी चरखा तो कभी गाय बछड़ा हुआ करता था।

पार्टी को वर्तमान चुनाव चिन्ह यानि हाथ किसकी देन है, यह बहुत कम ही लोग जानते हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी का लोगो दिवंगत प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को तत्कालीन कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती का आशीर्वाद है। कहा जाता है कि श्रीमती गांधी के गर्दिश के दिनों में शंकराचार्य से आर्शीवाद लेने गयीं थी, उनके आशीर्वाद ने उस समय श्रीमती गांधी की सत्ता में न केवल वापसी करायी थी बल्कि कांग्रेस को फिर से पुराने वजूद में खड़ा करने में अहम भूमिका निभायी थी।

लम्बे समय तक दो बैलों की जोड़ी कांग्रेस का चुनाव चिन्ह रहा। वर्ष 1969 में पार्टी विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने इस चिन्ह को जब्त कर लिया। कामराज के नेतृत्व वाली पुरानी कांग्रेस को तिरंगे में चरखा जबकि नयी कांग्रेस को गाय व बछडे का चुनाव चिन्ह मिला। वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस की बदहाली शुरू हुई। इसी दौर में चुनाव आयोग ने गाय बछड़े के चिन्ह को जब्त कर लिया। रायबरेली में करारी हार के बाद सत्ता से बाहर हुई कांग्रेस के हालात देखकर पार्टी प्रमुख इन्दिरा गांधी काफी परेशान हो गयीं। परेशानी की हालत में श्रीमती गांधी तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती का आशीर्वाद लेने पहुंची।

इंदिरा गांधी की बात सुनने के बाद पहले तो शंकराचार्य मौन हो गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने अपना दाहिना हाथ उठाकर आर्शीवाद दिया तथा हाथ का पंजा पार्टी का चुनाव निशान बनाने को कहा। उस समय आंध्र प्रदेश समेत चार राज्यों का चुनाव होने वाले थे। श्रीमती गांधी ने उसी वक्त कांग्रेस आई की स्थापना की और आयोग को बताया कि अब पार्टी का चुनाव निशान पंजा होगा। शंकराचार्य के आर्शीवाद के बाद कांग्रेस पुनर्जीवित हो गयी तथा चार राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की जोरदार जीत हुई।

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