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जापान के साथ मिलकर चीन को ऐसे घेरेंगे पीएम मोदी


नई दिल्ली (1 सितंबर): जापानी पीएम शिंजो आबे के दो दिन के दौरे को भले ही बुलेट ट्रेन से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन जानकार मानते हैं कि इसके पीछे पीएम मोदी का मकसद चीन को घेरना भी है।

चीन के वन बेल्ट वन रोड (OBOR) प्रॉजेक्ट के मद्देनजर भारत और जापान की रिश्तों को बेहतर करने की पहल और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है। दोनों ही मुल्क चाहते हैं कि आबे और मोदी के मुलकात से एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर (AAGC) जैसे प्रॉजेक्ट को रफ्तार मिले। भारत और जापान की साझीदारी से जुड़े इस प्रॉजेक्ट में ईरान के चाहबहार बंदरगाह को विकसित करना भी शामिल है।

इस साल की शुरुआत में, सिविल न्यूक्लियर डील के प्रभाव में आने के बाद दोनों देशों के बीच कोई ऐसा अहम मुद्दा नहीं बचा, जो लंबित पड़ा हो। ऐसे में दोनों ही देश मानते हैं कि रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए यही सही वक्त है। सिविल न्यूक्लियर डील के अलावा रक्षा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के बीच रिश्तों के मजबूत पिलर्स हैं। दरअसल, जापान अपने सैन्य साजोसामान भारत को बेचने का इच्छुक है।

एशिया और अफ्रीका में बेहतर कनेक्टिविटी बनाने के मकसद को पूरा करने के लिए दोनों देशों को एक दूसरे की अहमियत के बारे में अच्छे से पता है। जहां जापान बेहद कम दरों पर वित्तीय मदद मुहैया करा रहा है, वहीं भारत की अफ्रीकी देशों में मौजूदगी और छवि, दोनों ही बेहद मजबूत है। आबे के भारत दौरे पर AAGC प्रॉजेक्ट की औपचारिक शुरुआत हो सकती है। भारत और जापान इस प्रॉजेक्ट को चीन के OBOR की छवि के ठीक उलट उसके जवाब के तौर पर पेश करेंगे। भारत और जापान का इस प्रॉजेक्ट में कानून के राज और पारदर्शिता पर विशेष जोर रहेगा।

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