सिर्फ मनोरंजन ही नहीं समाज को जागरूक भी कर रहा है बॉलीवुड

मनोरंजन | Nov. 14, 2017, 11:56 a.m.

नई दिल्ली (14 नवंबर): बॉलीवुड को दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री के रुप में माना जाता हैं, जहां पर बनने वाली फिल्म हमारे समाज को और हमें काफी हद तक प्रभावित करती हैं। हमारे देश की ज्यादातर युवा पीढ़ी बॉलीवुड के सितारों से काफी प्रभावित है। किसी को शाहरुख जैसा बनना है तो किसी को सलमान।

बॉलीवुड में हर शुक्रवार को फिल्में रिलीज होती है जिसे हर वर्ग के लोग यहां तक बुज़ुर्ग और बच्चे भी देखने जाते हैं। आप समझ सकते है कि जब बड़ी संख्या दर्शक बॉलीवुड की फिल्में देखने जाते है तो ऐसे में बॉलीवुड निर्माता पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना होता है कि उनकी फिल्म समाज में कैसा प्रभाव डाल रही है।

फिलहाल आजकल फिल्मों में काफी परिवर्तन आ रहा है। घर-घर की कहानी से हट कर निर्माता समाज के गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे हम रीयलिस्टिक सिनेमा कहते हैं। इन्हीं में एक मुद्दा है, मानसिक प्रतिबंध। समाज में, मानसिक रोगियों को लेकर जो कलंक या हीन भावना है, उसके विरुद्ध लड़ने में बॉलीवुड हमारी मदद करता है।

बर्फी, तारे ज़मीन पर, ब्लैक, गुज़ारिश, और मार्गरिटा विथ अ स्ट्रॉ जैसी फिल्मों में मानसिक रोग को एक ख़ुशी, एक क्षमता की तरह दिखाया गया है। बर्फी में एक गूंगे और बहरे इंसान को हम खुशहाली से ज़िन्दगी बिताते देखते हैं, हँसते मुस्कुराते देखते हैं, तो हमें लगता ही नहीं की ये कोई दुर्बलता हो सकती है।

दूसरी तरफ उसी फिल्म में झिलमिल जो की एक ऑटिस्टिक लड़की हैं, प्यार और रिश्तों की परिभाषा बताती है और जब ये चरित्र हमारे पसंदीदा कलाकार रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा निभा रहे हैं, तो हमें ये मानसिक बीमारी कलंकित नहीं लगता। उनका मज़ाक बनाने के बजाए, उनसे जुड़ जाते हैं, और हमदर्दी से हम फिल्म को और अभिनेताओं को सराहते हैं।

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