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'वन बेल्ट, वन रोड' पर भारत की ना से तिलमिलाया चीन

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (20 मार्च): भारत ने गिलगिट-बल्तिस्तान का मुद्दा क्या उठाया, चीन के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। चीन को पाकिस्तान से होकर जाने वाला इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC प्रोजेक्ट खतरे में पड़ता दिख रहा है। चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक लेख लिख यह चिंता जगजाहिर की है। ग्लोबल टाइम्स के लेख का शीर्षक है "New Delhi could benefit by adopting open attitude to Belt and Road initiative" यानी नई दिल्ली वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट पर खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो उसे फायदा हो सकता है। इस लेख के शीर्षक के जरिए चीन भारत को लालच देने के साथ धमकाने की कोशिश भी कर रहा है। कैसे कोशिश कर रहा है हम आपको बताते हैं। वन बेल्ट वन रोड (OBOR)प्रोजेक्ट चीन को महत्वकांशी परियोजना है जो CPEC प्रोजेक्ट का एक हिस्सा। OBOR के जरिए चीन सड़क रास्ते से मध्य एशिया और यूरोप से सीधा जुड़ना चाहता है। इस परियोजना से पाकिस्तान को फायदा हो या ना हो चीन को बहुत बड़ा फायदा होगा। लेकिन इस परियोजना में एक समस्या है, परियोजना पाकिस्तान के गिलगिट-बल्तिस्तान से निकलती है जो पाक अधिकृत कश्मीर का एक क्षेत्र। ऑटोनॉमस रीजन होने के बावजूद पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से इस क्षेत्र में अवैध रूप से दखल दे रखी है।


आइए जानते हैं ग्लोबल टाइम्स ने क्या लिखा...

    * नई दिल्ली वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो उसे फायदा हो सकता है।

    * अगर भारत अपने आपको इससे अलग रखता है तो वह चीन के बढ़ते दबदबे को सिर्फ देखता रह जाएगा।

    * चीन को वन बेल्ट वन रोड पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मिल रहा है, लेकिन भारत इसके पक्ष में नहीं है।

    * कश्मीर के चलते भारत-पाक के बीच विवाद है, इसके चलते क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट करने से दूरी बनाकर रखी है।

    * चीन मई में OBOR सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है जिसमें 50 से ज्यादा देश शामिल होंगे।

    * भारत खुद को OBOR से अलग रखना चाहता है तो इससे उसे वैश्विक समुदाय का समर्थन प्राप्त नहीं होगा।

    * CIA के पूर्व निदेशक ने ओबामा प्रशासन का एशिया इन्वेस्टमेंट बैंक को गलत बताना एक रणनीतिक गलती माना।

    * उम्मीद है कि भारत यूएस से एक सबक सीख सकता है और OBOR के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना सकता है।


क्या है वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट...

    * वन बेल्ट वन रोड यानी OBOR परिजोयना चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर योजना का हिस्सा है।

    * OBOR परिजोयना के जरिए चीन सड़क मार्ग से सीधा मध्य एशिया और यूरोप से जुड़ जाएगा।

    * अभी चीन साइबेरियन रेल लाइन के जरिए अपना माल 12 हजार किमी दूर लंदन भेजता है।

    * लेकिन सर्दियों में साइबेरियन रेल लाइन ठप हो जाती है तो चीन माल समुद्री मार्ग के जरिए भेजता है।

    * लेकिन CPEC पर वन बेल्ट वन रोड परिजोयना चालु हो जाने के बाद 12 महीने सफर जारी रहेगा।

    * साथ ही अभी 12 हजार किमी का जो सफर तय करना पड़ता है वो घटकर 8 हजार किमी रह जाएगा।


चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर(CPEC)पर भारत-चीन आमने-सामने...

    * CPEC पाकिस्तान के कराची, ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा।

    * CPEC पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरता है।

    * इसी कारण भारत को आपत्ति है, इससे पीओके में चीन का प्रभुत्व बड़ रहा है।

    * पीएम मोदी CPEC के मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एतराज जता चुके हैं।

    * CPEC पर भारत के ऐतराज पर रूस भी उसके समर्थन में खड़ा रहा है।

    * चीन इस परियोजना के तहत पाकिस्तान में 3 लाख करोड़ रुपए निवेश कर चुका है।

    * इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी 3000 किमी का रेल-सड़क नेटवर्क बन चुका है।

    * 1 दिसंबर 2016 को चीन ने पाकिस्तान अपनी पहली रेलगाड़ी भी भेज दी थी।

    * उसने दक्षिण में स्थित कुन्मिंग से कराची तक 3500 किमी की दूरी तय की गई।


CPEC पर चीन चला चुका है पहली रेलगाड़ी...

    * 1 दिसंबर 2016 को चीन ने पाकिस्तान अपनी पहली रेलगाड़ी भेजी।

    * उसने दक्षिण में स्थित कुन्मिंग से कराचीतक मालगाड़ी सेवा शुरू की।

    * ये रेल लाइन करीब 3500 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

    * युन्नान से होते हुए तिब्बत के रास्ते ये मालगाड़ी गिलगित-बल्तिस्तान में प्रवेश करेगी।

    * वहां से इस्लामाबाद, लाहौर होते हुए कराची पहुंचेगी।

    * यहां से सामान ग्वादर पोर्ट तक पहुंचाया जाएगा।

    * इससे साऊथ चाइना सी को अरब सागर से सीधा जोड़ दिया गया है।


पाक सीनेट को किस बात है डर...

    * CPEC को पाक सीनेट की एक विशेष कमेटी ने भी विफल करार दिया है।

    * सीनेट की स्थायी समिति के अध्यक्ष ताहिर मशहादी ने चीन पर लगाया है आरोप।

    * डॉन अखबार के अनुसार CPEC समुद्र के किनारे एक और ईस्ट इंडिया कंपनी है।

    * CPEC से पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं की जा रही है।

    * CPEC पर बलोचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाया है।

    * कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बलोचियों के संसाधनों को लूटने का षडयंत्र है।

    * कार्यकर्ताओं ने हाल ही में लंदन में चीनी दूतावास के बाहर CPEC को लेकर प्रदर्शन भी किया।

    * प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए बनाई गई हैदर कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे विफल माना है।

    * कमेटी ने कहा कि कॉरिडोर के 1,674 किमी पश्चिमी हिस्से में सरकार की प्राथमिकता में नहीं।

    * डॉन अखबार के अनुसार ग्वादार पोर्ट तक जो सड़क बननी थी वहां निर्माण संभव ही नहीं।

    * रिपोर्ट के मुताबिक पोर्ट बन भी गया तो बिजली नहीं मिलेगी क्योंकि ट्रांसमिशन लाइनों का काम ही नहीं हुआ।


CPEC से चीन को कैसे होगा फायदा...

    * चीन ने सीपीईसी परियोजनाओं में 46 अरब डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपए निवेश किया है।

    * इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी, इसके पूरा होने तक 3 हजार किमी का रेल-सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा।

    * सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा।

    * अभी चीन को ग्वादर पोर्ट जाने के लिए 12 हजार किमी के समुद्री मार्ग से सफर तय करना पड़ता है।

    * सीपीईसी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद चीन को अपने बॉर्डर से सिर्फ 1800 किमी का सफर तय करना पड़ेगा।

    * बीजिंग से ग्वादर पोर्ट की दूसरी महज आधी से भी कम (5200 किमी) रह जाएगी।

    * चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं।

    * इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है।

    * सीपीईसी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

    * चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है।

    * चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है।

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