अगर आप भी देते हैं बच्चों को मोबाइल तो जरूर पढ़ें ये खबर

देश | Oct. 8, 2017, 2:12 p.m.


नई दिल्ली (8 अक्टूबर): सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल हुआ है। मैसेज में लिखा है, ''सावधान सस्ते चाइनीज मोबाइल की रोशनी आपके बच्चे की आंख की रोशनी छीन सकती है।'' महाराष्ट्र की स्वास्थ्य सेवा विभाग और जेजे अस्पताल ने बच्चों के मोबाइल यूज करने को लेकर एक सर्वे किया है।

सर्वे का सच चौंकाने वाला है। सर्वे में पता चला है कि मोबाइल से निकलने वाली तेज रोशनी की वजह से 71 हजार बच्चों की आंखें हमेशा के लिए खराब हो गईं। ये मैसेज ज्यादा से ज्यादा फैलाइये और अपने बच्चों को सस्ते मोबाइल की रोशनी से दूर रखिये।

खबर में 71 हजार बच्चों की आंख की रोशनी जाने का जिक्र था। मैसेज डराने वाला था, लेकिन सवाल ये था कि क्या सच में मोबाइल की रोशनी आंखें खराब कर सकती है? क्या महाराष्ट्र की स्वास्थ्य सेवा विभाग ने सच में ऐसा कोई सर्वे किया है ? क्या सच में जेजे अस्पताल ने बच्चों पर कोई सर्वे किया है ? क्या सच में मोबाइल से 71 हजार बच्चों की आंखें खराब हो गईं ?

सवाल ये भी था कि कहीं ये मैसेज भी सोशल मीडिया पर तैर रहे हज़ारों अफवाहों वाले मैसेज जैसा तो नहीं है। इस मैसेज का सच जानने के लिए हमने कुछ ऐसे बच्चों से बात की जिन्हें हाल में ही डॉक्टर ने चश्मा लगाने को कहा है।

जिन बच्चों को हाल में ही चश्मा लगा है उनका कहना था कि डॉक्टर ने उन्हें ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से मना किया है। इस परिवार से बातचीत में इतना तो पता चला कि ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल करना बच्चों की आंखों को नुकसान पहुंचाता है। अब पता ये करना था कि वायरल मैसेज में जिस सर्वे का जिक्र हुआ है, वो हुआ भी है या नहीं। इस मैसेज में जेजे अस्पताल के सर्वे का जिक्र था। इसलिए हम इस वायरल मैसेज की पड़ताल के लिए मुबई के जेजे अस्पताल पहुंचे।

हमें पता चला कि सचमुच मुंबई के इस अस्पताल ने स्वास्थ्य विभाग के साथ एक सर्वे किया है और उसके नतीजे चौंकाने वाले हैं।

- 1508 स्कूलों में जाकर डॉक्टरों द्वारा सर्वे किया गया
- इन स्कूलों के 7 लाख 50 हज़ार बच्चों की आंखों की जांच डॉक्टरों द्वारा की गई
- जिनमें पाया गया कि 91 हज़ार बच्चों को आंखों की रौशनी कमजोर हो गयी और इन बच्चों के घरों में इन्हें और इनके माता पिता को इस बात की कोई जानकारी नही है कि इन्हें चश्मा क्यों लगा है।

सर्वे का नतीजा...
- 91 हज़ार बच्चों में से 71 हज़ार बच्चे 4 घंटों से लेकर 8 घंटे मोबाइल से खेलने में वक़्त गुजारते है इसलिए इनकी आंखें कमजोर हो गई है।
- 5 साल के बच्चे अगर मोबाइल की स्क्रीन पर टकटकी लगाकर देखते रहे तो कई घातक परिणाम हो सकते है
- मोबाइल पर वीडियो देखने से बच्चों को चश्मा लगने के मामले बढ़ रहे हैं
- मोबाइल स्क्रीन पर चल रहे वीडियो से मायोपिया यानी आंखों की रोशनी घटने की समस्या हो रही है।

हमारी पड़ताल में पता चला कि सचमुच मोबाइल का देर तक इस्तेमाल करने से हर 10 बच्चों में से 1 बच्चे की आंख कमजोर हो रही है। ऐसे में अपने आंखों के तारे को मोबाइल से बचाना बेहद जरूरी है।

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