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नोटबंदी: कालेधन को सफेद करने का शक, पेट्रोल पंपों की जांच में जुटा आयकर विभाग

नई दिल्ली ( 19 मार्च ): नोटबंदी के बाद से ही लोगों ने कालेधन को सफेद करने के करई तरीके अपनाए। अब आयकर विभाग ने कालेधन को गैरकानूनी ढंग से सफेद करने के शक में देशभर के पेट्रोल पंपों और गैस सिलेंडर वितरकों पर छापे मारने शुरू कर दिए हैं। कालेधन पर शिकंजा कसने के लिए 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को मोदी सरकार ने चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की थी जिसके बाद भी पेट्रोल और रसोई गैस सिलेंडर खरीदने के लिए 3 दिसंबर तक इन नोटों के इस्तेमाल की इजाजत थी।


ऐसे में आयकर अधिकारियों को शक है कि पेट्रोल पंप मालिकों ने इस छूट का गलत फायदा उठाते हुए इसकी आड़ में लोगों के कालेधन को सफेद किया। इसी शक के आधार पर आयकर विभाग अधीनियम की धारा 133-ए के तहत विभाग पेट्रोल पंप मालिकों के कैशबुक की जांच कर रहा है। विभाग की इस कवायद का मकसद यह पता करना है कि पंप मालिकों द्वारा बैंक खाते में जमा रकम उनके ब्रिकी रिकॉर्ड से मेल खाता है या नहीं।


हालांकि कुछ आयकर अधिकारी इस कार्रवाई को छापा नहीं, बल्कि रूटीन सर्वे बता रहे हैं। आयकर अधिकारी के हवाले से छपी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सर्वे में यह बात सामने आई कि नोटबंदी के दौरान पेट्रोल पंपों ने औसत बिक्री से 15% ज्यादा रकम बैंक खाते में जमा कराई।


रिपोर्ट के मुताबिक, 6 मार्च से ही पेट्रोल पंप और रसोई गैस वितरकों के दफ्तर में ये सर्वे किए जा रहे हैं और सेल व डिपॉजिट में इस अंतर का ब्यौरा मांगा है। वहीं आयकर नोटिस पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत टैक्स और उस पर 49.90% का जुर्माना वसूला जा रहा है।

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