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कई बार इंटरनेशनल कोर्ट की शरण में जा चुका है ना'पाक' पाकिस्तान

नई दिल्ली (18 मई ): कहते हैं कि चोर चोरी से जाए पर हेराफेरी से ना जाए। पाकिस्तान पर ये कहावत कई बार लागू हो चुका है लेकिन फिर भी वो अपनी ना'पाक' हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर इंटरनेशनल कोर्ट से फजीहत झेलने के बाद अब पाकिस्तान ने ICJ का आदेश मानने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ये हरकत उस वक्त कर चुका है जब वो कई बार भारत के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट की शरण में जा चुका है।

यूएन में बार-बार कश्मीर राग अलापनेवाला पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के तहत वर्ष 1945 में स्थापित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की शरण में भी जा चुका है।


- 1971 में पहली बार पाकिस्तान ने ICJ की शरण ली उस वक्त ली थी जब भारत के एक विमान का अगवा कर वो लाहौर ले गया था। अपने विमान के अपहरण के बाद भारत ने पाकिस्तानी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने से रोक दिया था। उस वक्त पाकिस्तान ICJ ने से अपील की कि वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत पर अपना फैसला बदलने का दबाव बनाये। पाकिस्तान ने कहा कि भारत न तो अपने वायु क्षेत्र में उसके विमानों को उड़ान भरने से रोक सकता है, न ही भारत में कहीं उसके विमान को लैंडिंग से रोक सकता है।


- पाकिस्तान ने 1973 भारत के खिलाफ ICJ का रुख किया था। तब पाकिस्तान ने कहा था कि भारत 1971 युद्ध में बंदी बनाये गये उन 195 पाकिस्तानी नागरिकों को बांग्लादेश के हवाले न करे, जिनके खिलाफ जनसंहार के मामले में मुकदमा चलाया जाना था। हालांकि, एक साल बाद पाकिस्तान ने अपना यह मुकदमा वापस ले लिया।


- 1999 में पाकिस्तान एकबार फिर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पहुंचा। इस बार गुजरात के कच्छ के रन में भारतीय वायु सीमा में पाकिस्तानी सैन्य विमान को मार गिराया गया था। भारत ने मजबूती के साथ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने भारत की कार्रवाई को जायज ठहराया और पाकिस्तान को यहां भी मुंह की खानी पड़ी थी।

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