आज सूर्यास्त के बाद मकर संक्रांति, जानें इस पर्व का महत्व

देश | Jan. 14, 2018, 2:03 a.m.

नई दिल्ली (14 जनवरी): रविवार को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसी के साथ मकर संक्रांति का पर्व शुरू हो जाएगा, जो सोमवार तक चलेगा। पर्व मनाने के लिए घरों-मठों में तैयारियां कर ली गईं हैं। लोग आज पुण्य की डुबकी लगाने के बाद तिल के लड्डू, खिचड़ी आदि का दान करेंगे। इस दौरान पतंगबाजी भी जमकर होगी। इसी के साथ खरमास भी खत्म हो जाएगा, लेकिन शुक्र 4 फरवरी को उदय होगा, लिहाजा तभी मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।

लोहड़ी के अगले दिन 'मकर संक्रान्ति' का त्योहार मनाया जाता हैं जिसे माघी भी कहते हैं। यह त्योहार सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं बल्कि पूरे भारत में खास महत्व रखता हैं हालांकि हर राज्य में इस त्योहार को अलग नाम से जाना जाता हैं जैसे पंजाब में माघी, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण पर्व,तमिलनाडु में पोंगल, असम में हुगली के अलावा इसके और भी बहुत से नाम है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। इस दिन से सूर्य दक्षिण के बजाय उत्तर दिशा की तरफ गमन करने लगता है जिसे सेहत व शांति दोनों के लिए अच्छा होता है।

इस बार मकर संक्रांति का पर्व 14 एवं 15 जनवरी दोनों दिन मनाया जाएगा। इस संबंध में पंडितों के अलग-अलग मत हैं। कुछ पंडितों ने मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को बताया है जबकि कुछ पंडितों ने इसे गलत बताते हुए 15 जनवरी बताया है। 

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढक़र पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। 

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