खुली केजरीवाल सरकार की पोल, 'धुंध' को लेकर दिया ये धोखा

देश | Nov. 16, 2017, 10:28 a.m.


वरुण सिन्हा, नई दिल्ली (16 नवंबर):
दिल्ली की धुंध को दिल्लीवालों से हुए बहुत बड़े धोखे पर बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। ये खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ है। पता चला है कि दिल्ली सरकार ने दो साल में प्रदूषण हर्जाने के तौर पर ट्रकों से 787 करोड़ 12 लाख रुपए वसूले थे जबकि इसमें से प्रदूषण रोकने पर सिर्फ 93 लाख रुपए खर्च किए। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली को साफ रखने के नाम पर वसूला गया पैसा दिल्ली पर खर्च क्यों नहीं किया गया।

दिल्ली के प्रदूषण पर हायतौबा मचाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल लगता है ट्विटर पर इस समस्या को सुलझाने में यकीन रखते हैं। दिल्ली को गैस चैंबर बताने वाले केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने इस मामले में कितनी सुस्ती दिखाई है, इस पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक आरटीआई में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली सरकार ने दो साल में प्रदूषण हर्जाने के तौर पर ट्रकों से 787 करोड़ 12 लाख रुपए वसूले जबकि खर्च किए सिर्फ 93 लाख। यही नहीं आरटीआई में ये भी खुलासा हुआ है कि 2017 में इन्वायरमेन्ट कंपनसेशन चार्ज के तौर पर वसूले गए 787करोड़ 12 लाख रुपए में से इस साल केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एक रुपया खर्च भी नहीं किया।

आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला...
- अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दिल्ली में दाखिल ट्रकों से प्रदूषण हर्जाना वसूला जाए
छोटे ट्रकों से 700 रुपए और बड़े ट्रकों से 1300 रुपए दिल्ली नगर निगम हर्जाना वसूल कर दिल्ली सरकार को देगी।
- आरटीआई कार्यकर्ता संजीव जैन को मिले जवाब में जानकारी मिली है कि दिल्ली सरकार को 2015 में 50 करोड़ 65 लाख रुपए मिले, 2016 में प्रदूषण हराजना 386 करोड़ रुपए मिले जो बढ़कर 2017 में 786.12 करोड़ रुपए हो गए।
- जानकारी मिली है कि दिल्ली सरकार ने 2016 में मात्र 93 लाख खर्च किए जबकि 2017 में कोई भी पैसा खर्च नहीं हुआ।

इस मामले में आम आदमी पार्टी ने सफाई देने के बजाय दोष एलजी के माथे मढ दिया। आप का कहना है कि हमारी सरकार के काम में उपराज्यपाल अडंगे डाल रहे हैं। हम बसें खरीदना चाहते हैं, लेकिन बसों को खड़ा करने के लिए जगह नहीं है। डीडीए को 90 करोड़ का पेमेन्ट भी कर दिया, लेकिन जमीन आज तक नहीं मिली।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ट्विट्र पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री से मुलाकात का वक्त मांग रहे। दिल्ली से चंडीगढ तक हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलने भी चले गए, लेकिन 786 करोड़ को खर्च करने का इंतजाम नहीं कर पाए।
 

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