AAP को तीन साल पूरे लेकिन नजर चुनाव पर

देश | Feb. 14, 2018, 12:34 p.m.


रमन कुमार, नई दिल्ली (14 फरवरी):
अरविंद केजरीवाल को राजनीति में आए भले ही ज्यादा समय नहीं हुआ हो, लेकिन वह राजनीति के मास्टर खिलाड़ी माने जाते हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बने तीन साल हो रहे हैं। 2015 में 14 फरवरी को आप सरकार ने दिल्ली के रामलीला मैदान में शपथ ली थी। पिछले तीन साल राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव में बीता है, अब भी टकराव जारी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री की हालत ऐसी है कि वे अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर तैयार कराए गए वीडियो विज्ञापन को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं ले पाए। एक लाइन की वजह से इसका प्रसारण अटक गया, हो सकता है देर सबेर अनुमति भी मिल जाए।

तीन साल की उपलब्धियों का प्रचार आम आदमी पार्टी के नेता किसी ना किसी रूप में कर रहे हैं। पर यह प्रचार बुनियादी रूप से दिल्ली में संभावित उपचुनाव के लिहाज से किया जा रहा है। दिल्ली के 20 विधायकों की सदस्यता खतरे में है। लाभ का पद हासिल करने के मामले में आप विधायकों की सदस्यता खत्म करने की चुनाव आयोग की सिफारिश राष्ट्रपति ने मंजूर कर ली थी और केंद्र सरकार ने उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।

अयोग्य ठहराए गए विधायकों ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। फिलहाल कोर्ट ने उपचुनावों की अधिसूचना रोक दी है, पर माना जा रहा है कि इस मामले में विधायकों की याचिका खारिज हो सकती है और ऐसी हालत में दिल्ली की 20 सीटों के लिए उपचुनाव होंगे। सभी पार्टियां इसकी तैयारी में लग गई हैं। काफी समय के बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल सड़कों पर उतरे हैं। वे अलग-अलग इलाकों में जाकर सीलिंग से लोगों को हो रही परेशानी का मुआयना करके लोगों को अहसास करा रहे हैं, ये मोदी सरकार इसकी जिम्मेदार है। साथ ही साथ बिजली और पानी की स्थिति का पता भी लगा रहे, और स्वास्थ्य सेवाओं पर खुद नजर रखे हुए हैं।

हालांकि इन सीटों की जीत हार से उनके बहुमत पर असर नहीं होना है, लेकिन उन्हें पता है कि पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो भाजपा और कांग्रेस तोड़-फोड़ शुरू कर देंगे और सरकार पर खतरा मंडराने लगेगा। पंजाब चुनाव में हार के बाद केजरीवाल दिल्ली में कोई रिस्क लेने को तैयार नही हैं।

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