जानें पूरी खबर, कैसे गई केजरीवाल के 20 विधायकों की सदस्यता

देश | Jan. 21, 2018, 10:15 p.m.

नई दिल्ली (21 जनवरी): दिल्ली में आम आदमी पार्टी को आज बड़ा झटका लगा। केजरीवाल के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई। दोहरे लाभ के पद पर रहने के मामले में चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से इसकी सिफारिश की थी जिस पर राष्ट्रपति ने मुहर लगा दी। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में अब अदालत जाने की बात कही है केजरीवाल पहले दिन से ये दावा करते रहे कि उन्होंने जो किया वो सही किया, इसमें कुछ भी गलत नहीं। विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मामले में एक तरफ उन्होंने अपने फैसले को सही ठहराया तो दूसरी तरफ विधायकों पर खतरे की आहट भांप उन्होंने दिल्ली विधानसभा में इसको लेकर विधायक तक पास कराया लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिलने से बात अटक गई। और आखिरकार दोहरे लाभ के पद ने विधायकों की सदस्यता ले ली। बावजूद इसके केजरीवाल अपने फैसले को गलत मानने को तैयार नहीं।


दरअसल दिल्ली में कानूनन कोई विधायक सरकार में लाभ का कोई भी ऐसा पद हासिल नहीं कर सकता जिसमें भत्ते या फिर शक्तियां मिलती हों। बावजूद इसके 13 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया। इस पर 19 जून 2015 को वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास याचिका दाखिल कर इसे दोहरे लाभ के पद का मामला बताया। प्रशांत पटेल ने मांग की कि ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले की वजह से इन विधायकों की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। इसके बाद  24 जून 2015 को केजरीवाल सरकार ने दिल्ली विधानसभा में एक बिल पास करवाया जिसमें संसदीय सचिव के पद पर नियुक्ति को दोहरे लाभ के पद से बाहर रखने का प्रावधान था। और इसमें पिछली तारीख से संसदीय सचिवों को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में छूट देने की बात थी

13 जून 2016 को राष्ट्रपति ने इस बिल को मंजूरी देने से मना कर दिया। तब प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति थे। 25 जून 2016 को केंद्र सरकार ने बिल विधानसभा को भेज दिया। 14 से 21 जुलाई 2016 के बीच चुनाव आयोग ने 21 विधायकों की व्यक्तिगत सुनवाई की। 8 सितंबर 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के आदेश को रद्द कर दिया। 8 सितंबर 2016 को चुनाव आयोग ने 21 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। 24 जून 2017 को चुनाव आयोग ने आप विधायकों की अपील को ठुकरा दिया। 9 अक्टूबर 2017 को फिर से नोटिस जारी कर आयोग ने विधायकों से सफाई मांगी और  19 जनवरी 2018 को आयोग ने सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर दी। जिसके बाद राष्ट्रपति ने भी आयोग की सिफारिशों पर मुहर लगा दी।


राष्ट्रपति के फैसले के बाद विधानसभा में 66 एमएलए वाली आम आदमी पार्टी की ताकत 46 पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी के जाने-माने चेहरे अब माननीय नहीं रहे। दर्द गहरा है लेकिन दावा है कि जब जनता अपने साथ है फिर घबराने की क्या बात है। अब आम आदमी पार्टी की निगाहें अदालत पर टिकी हैं। उसे भरोसा है कि 20 सीटों पर उपचुनाव की नौबत ही नहीं आएगी...उनके जिन विधायकों पर गाज गिरी है...उनकी सदस्यता आखिरकार बहाल हो जाएगी। 

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