56 साल की महिला ने रचा कीर्तिमान, अंटार्कटिका में बिताया एक साल

देश | March 18, 2018, 11:06 a.m.

नई दिल्ली(18 मार्च): 56 साल की एक महिला जिसने कभी बर्फबारी का अनुभव भी नहीं लिया हो वह दुनिया के सबसे ठंडे इलाके अंटार्कटिका में 403 दिन से ज्यादा बिताए हैं। 
ISRO की वैज्ञानिक मंगला मणि एक 23 सदस्यों के जांच दल के साथ नवंबर 2016 में अंटार्कटिका स्थित भारत के रिसर्च स्टेशन भारती गई थीं। इस दल में मंगला अकेली महिला थीं।

- टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में मंगला बताया कि वह पिछले दिसंबर में ही अपना मिशन पूरा कर लौटी हैं। 

- उन्होंने कहा, 'अंटार्कटिका का मिशन एक बहुत बड़ा चैलेंज था। वहां का मौसम बेहद कठोर है। हम अपने रिसर्च स्टेशन से बेहद सतर्क होकर बाहर निकलते थे। वहां 2-3 घंटे बाहर रहने के बाद हमें गर्मी लेने के लिए वापस स्टेशन पर लौटना पड़ता था।' मंगला 2016-17 के दौरान अकेली ऐसी महिला वैज्ञानिक हैं जो अंटार्कटिका के मिशन पर गई थीं। वहां चीन और रूस के रिसर्च स्टेशन पर भी इस दौरान कोई महिला वैज्ञानिक नहीं थी। अपनी टीम के बारे में मंगला ने कहा, 'मेरे टीम मेंबर काफी सहयोगी थे। उन्होंने रिसर्च स्टेशन पर मेरा जन्मदिन भी मनाया था।' 

- इस मिशन के लिए चुनाव होने से पहले मंगला और उनकी टीम की कई हफ्तों तक शारीरिक और मानसिक जांच से गुजरना पड़ा। सबसे पहले नई दिल्ली के एम्स में उनका मेडिकल चेकअप एक हफ्ते तक चला। इसके बाद उन्हें उत्तराखंड के ऑली और बद्रीनाथ ले जाया गया ताकि उनकी शारीरिक क्षमताओं की परख हो सके। मंगला ने कहा, 'यह टेस्ट हमारे शरीर को अंटार्कटिका भी भीषण सर्दी के लिए तैयार करने के लिए किया गया था। इसके अलावा इस टेस्ट के दौरान हमारे दल में कठिन समय में टीम भावना के साथ काम करने की कला भी विकसित की गई।' 

- उन्होंने बताया, 'गर्मी के मौसम में पानी के जहाज अंटार्कटिका की टीम के लिए पूरे साल का राशन दे जाते हैं क्योंकि सर्दियों में यह सबसे ठंडा इलाका दुनिया से कट जाता है। इसके अलावा हमें अंटार्कटिका को साफ रखने के लिए सारा कचरा भी पैक करके वापस लाना होता है।' इतने कठिन मिशन को पूरा करने के बाद इसरो साइंटिस्ट ने कहा, 'हो सकता है कि पुरुष शारीरिक रूप से बलशाली हों लेकिन महिलाएं मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत होती हैं। सभी महिलाओं को अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए और हमेशा अच्छे से अच्छा काम करने की कोशिश करनी चाहिए।' 

- मंगला और उनकी टीम अंटार्कटिका में भारत के रिसर्च स्टेशन पर ध्रुवीय कक्षा में घूम रहे सैटलाइट्स के डेटा लेने के लिए गई थीं। अंटार्कटिका से कलेक्ट किया हुआ डेटा यह टीम कम्युनिकेशन सैटलाइट लिंक के जरिए हैदराबाद सेंटर भेज देती थी। अंटार्कटिका में मंगला मणि के काम की 2 संसदीय समितियों ने भी काफी तारीफ की है। 
 

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