इस शख्स ने बता दिया था, इराक में ऐसे मारे गए हैं सभी भारतीय, खुद ऐसे बचा

देश | March 20, 2018, 11:49 a.m.

नई दिल्ली (20 मार्च): साल 2014 में इराक के शहर मोसुल से 40 भारतीय नागरिकों को आतंकी संगठन आईएसआईएस ने अगुवा किया था, लेकिन उनमें से एक शख्स हरजीत मसीह किसी तरह से बचकर निकलने में कामयाब हो गया था। भारत आने के बाद हरजीत ने यह दावा किया था कि सभी को आईएस ने मार दिया है।

गुरदासपुर के हरजीत के इस दावे को उस समय विदेश मंत्रालय ने ख़ारिज कर दिया था। हरजीत ने अपनी जांघ पर गोली के ज़ख्म दिखाते हुए कहा था कि अगर उसका कोई साथी ज़िंदा बच गया होता तो सबसे ज़्यादा ख़ुशी उसे होगी, लेकिन 15 जून का दिन वह कभी नहीं भूलेगा। मौत उसे बेहद करीब से छूकर निकल गयी थी।

हरजीत और उसके साथियों को वतन वापस भेजने के नाम पर आईएसआईएस के आतंकियों ने कंस्ट्रक्शन कंपनी से 50 बांग्लादेशियों के साथ 11 जून को अगवा किया। इसके बाद उन्हें आईएसआईएस आतंकियों के दूसरे ग्रुप को सौंप दिया गया। फिर दो दिन बाद एक नया ग्रुप सबको अपने साथ किसी और ठिकाने पर ले गया।

यहां बांग्लादेशियों को भारतियों से अलग कर दिया गया और फिर अगले दिन सभी भारतीयों को एक बख़्तरबंद गाड़ी में डालकर किसी पहाड़ी पर ले जाया गया। आतंकियों ने यहां सबके फ़ोन और कैश ले लिए और उलटी तरफ मुंह करके खड़े होने को कहा व फायरिंग शुरू कर दी। हरजीत ने अपने दोनों तरफ साथियों को गिरते देखा। फायरिंग करीब 2 से 3 मिनट चली। एक गोली हरजीत कि जांघ छूकर निकल गयी, वह भी नीचे गिरा। साथ में खड़ा भारतीय उसके ऊपर गिर गया।

आतंकियों के जाने के करीब 15 मिनट बाद हरजीत उठा और अपने साथियों को आवाज़ लगाई। लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। हरजीत हाईवे पर पहुंचा और एक गाड़ी वाले से मदद मांगी, लेकिन बदकिस्मती से वह हरजीत को उन्हीं आतंकियों के पास ले गया। हरजीत ने यहां बताया कि उसका नाम अली है और वह बांग्लादेशी है। तब जाकर उसकी जान बची।

आतंकियों ने उसका पता पूछा और अगले दिन वापस मोसुल उसकी कंपनी में पंहुचा दिया, जहां उसने एक जानकार कैंटीन वाले को पूरा वाकया बताया। वह शख्‍स हरजीत को एर्बिल के बॉर्डर तक छोड़ गया, जहां पहुंचकर उसने भारतीय उच्चायोग से संपर्क साधा। एक हफ्ता इराक में रखने के बाद हरजीत को सरकार भारत ले आयी।

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