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22 साल के इस युवक ने 700 रुपये में पाया रैनसमवेयर वायरस पर काबू

नई दिल्ली (15 मई): रैनसमवेयर वायरस ने दुनिया में तबाही मचाई हुई है। हाल ही में करीब दुनिया के 150 देश इसकी चपेट में आए हैं। लेकिन इस वायरस पर एक 22 साल के शख्स ने काबू पा लिया है। इस बात की पुष्टी ब्रिटेन के एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने बीबीसी से की है। उनका कहना है कि है संयोग से मलिसस रैनसमवेयर को फैलने से रोकने में कामयाब रहे।


ब्रिटेन के रिसर्चर ने पहले नोटिस किया कि मलवेयर एक स्पेशल वेब ऐड्रेस से लगातार कनेक्ट होने की कोशिश कर रहा है, जिससे नए कंप्यूटर समस्याग्रस्त हो जाते है। लेकिन वेब ऐड्रेस के जुड़ने की कोशिश के दौरान- अक्षरों में घालमेल था और ये रजिस्टर्ड नहीं थे। मलवेयर टेक ने इसे रजिस्टर करने का फैसला किया और उसने 10.69 डॉलर (700 रुपए) में खरीद लिया।


इसे खरीदने के बाद उन्होंने देखा कि और किन कंप्यूटरों तक उसकी पहुंच बन रही है। इसी मलवेयर टेक को आइडिया मिला कि रैनसमवेयर कैसे फैल रहा था। इस मामले में उन्हें अप्रत्याशित रूप से रैनसमवेयर को रोकने में सफलता मिली। इस तरह के कोड को एक ‘किल स्विच’ के रूप में जाना जाता है। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है तो कुछ हमलावर सॉफ्टवेयर तक फैलने से रोकने में इसका इस्तेमाल करते हैं। मलवेयर टेक ने अपनी खोज का परीक्षण किया और जब रैनसमवेयर को रोकने में सफल रहे तो उन्हें प्रशंसा भी मिली।


कौन है ये शख्स

हमले को रोकनेवाला 22 साल का ये शख्स मलवेयरटेक उपनाम से जाना जाता है। उन्होंने एक हफ्ते की छुट्टी ली थी, लेकिन वैश्विक साइबर हमले के बाद उन्होंने रैनसमवेयर की जांच करने का फैसला किया। मलवेयरटेक ने चेतावनी दी है, हमलोगों ने इसे रोक दिया, लेकिन दूसरा फिर से आएगा और हम इसे रोक नहीं पाएंगे। इसमें काफी पैसा है और इसे रोकने की कोई वजह नहीं है क्योंकि इसके कोड बदलने की पर्याप्त कोशिश नहीं की गई है।

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