इस बच्चे का 22 लीटर खून पी गए पेट के कीड़े!

देश | Jan. 11, 2018, 4:15 p.m.


नई दिल्ली (11 जनवरी): अगर आपके घर में भी बच्चे हैं तो जिस खबर को हम बता रहे हैं, उसे अच्छी तरह समझना भी जरूरी है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पेट में बैठे एक 'रक्तबीज' दानव ने एक बच्चे के खून का कतरा-कतरा चूस लिया और वो रक्तबीज किसी भी बच्चे के शरीर में पहुंच सकता है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जो किसी के शरीर के अंदर का लग रहा है। इसमें कीड़े जैसा कुछ दिख रहा है, जिसके शरीर का निचला हिस्सा लाल है और ऊपर का पीला। कीड़े जैसी वो चीज लगाता हिल डुल रही है।

इस वीडियो के साथ मैसेज वायरल हो रहा, जिसमें लिखा है कि मिट्टी या घास पर नंगे पैर चलने की गलती न करें। पैर के रास्ते शरीर में दाखिल हुआ कीड़ा 14 साल के एक लड़के का 22 लीटर खून चूस गया। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने कैप्सूल के जरिये उसके पेट में कैमरा डाला तो खून चूसता हुआ ये कीड़ा दिखाई दिया। 6 महीने में एक बार पेट के कीड़े मारने की दवा का इस्तेमाल जरूर करें।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये मैसेज और वीडियो एक बच्चे से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसमें जो दावा किया जा रहा है उस पर एक बारगी यकीन करना मुश्किल है। सवाल ये था कि इंसान के शरीर में करीब 4 लीटर खून होता है तो कीड़ा 22 लीटर खून कैसे चूस सकता है!

वीडियो के साथ वायरल हो रहे मैसेज में इस बताया जा रहा था कि इस कीड़े की वजह से बीमार बच्चे का इलाज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हुआ था। इसलिए हमने अपनी पड़ताल सर गंगाराम अस्पताल से ही शुरू की। सर गंगाराम अस्पताल पहुंचकर हमें पता चला कि ऐसा एक मामला सामने आया तो था, लेकिन हाल फिलहाल में नहीं।

दो साल पहले गंगाराम अस्पताल में खून की कमी से संबंधित एक केस आया था। यहां पहुंचने से पहले 14 साल के बच्चे को खून और आयरन की कमी के की वजह से 50 बार खून चढ़ चुका था। इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे उत्तराखंड के हल्द्वानी से दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लाया गया। सर गंगा राम अस्पताल में हमारी मुलाकात डॉक्टर अनिल अरोड़ा से हुई।

डॉ अनिल अरोड़ा सीनियर डॉक्टर हैं और वह सर गंगाराम अस्पताल में गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन हैं। डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने हमें पूरी बात विस्तार से बताई दो साल पहले सर गंगाराम अस्पताल में एक ऐसे बच्चे को भर्ती किया गया था, जिसे पिछले 2 साल में करीब 22 लीटर यानी 50 यूनिट खून चढ़ चुका था। लेकिन खून चढ़ाने के कुछ ही दिन के अंदर उसके शरीर में फिर खून की कमी हो जाती थी। दरअसल बच्चे का करीब 22 लीटर यानी 50 यूनिट खून कीड़े पी गए थे।

कीड़े बच्चे का खून दो साल से चूस रहे थे। खून की कमी के चलते बच्चे को हर महीने खून चढ़ाना पड़ता था, लेकिन हर बार कीड़े किशोर का खून पी जाते थे। मुश्किल ये थी कि बच्चे की बीमारी इतनी बढ़ गई थी कि उसके शौच में खून आने लगा था, जिससे उसके शरीर में आयरन की कमी हो गई थी और किशोर एनिमिया से पीड़ित हो गया था। डॉक्टर के मुताबिक जब बच्चे को यहां लाया गया था तब उसके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 5.86 ग्राम प्रति डेसीलीटर रह गई थी।

बच्चे के शरीर में खून सूखता जा रहा था, लेकिन तमाम तरह की जांचों के बाद भी बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। मरीज के जितने भी टेस्ट पहले करवाए गए थे वो सब नॉर्मल थे, लेकिन मरीज का हीमोग्लोबिन इसके बावजूद घटता जा रहा था। बच्चे के पेट में पतले तार के जरिये कैमरा डालकर भी जांच की गई। ईजीडी, कॉलोनोस्कोपी और रेडियोग्राफी स्टडी की गई। सभी जांच रिपोर्ट नार्मल थीं, लेकिन बीमारी पकड़ नहीं आ रही थी।

तब सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर्स ने एक नई तकनीक से जांच का फैसला किया। ये तकनीक थी कैप्सूल में छिपे कैमरे से शरीर के अंदर पड़ताल करने की। डॉक्टर्स ने कैप्सूल एंडोस्कोपी से खून चूसने वाले कीड़ों का पता किया। कैप्सूल एंडोस्कोपी जांच में पेट के कीड़े नजर आए।

क्या है कैप्सूल एंडोस्कोपी ?
- इसमें कैप्सूल के आकार का एक वायरलेस कैमरा मुंह के जरिये पेट में डाला जाता है
- कैप्सूल कैमरा छोटी आंत में पहुंचकर हर सेकेंड 12 फोटो बाहर भेजता है
- इस तरह उस कैमरे से 12 घंटे में 70,000 तस्वीरें बाहर आती है
- कैप्सूल कैमरे के जरिये लाइव वाडियो भी स्क्रीन पर देखा जा सकता है

इस कैप्सूल कैमरे की मदद से जो फोटो और वीडियो सामने आए वो काफी चौंकाने वाले थे। शुरू के कई घंटे तक तो शरीर में कोई बीमारी हरकत नहीं दिखाई दी। फिर अचानक एक फोटो में कुछ अजीब दिखा। अब तक जो छोटी आंत का हिस्सा लग रहा था, वो छटपटाने लगा और उसका रंग बदलकर सुर्ख लाल हो गया। डॉक्टर समझ गए कि ये पेट का कीड़ा यानी हुक वर्म है जोकि तेजी से खून चूस रहा है।

डॉक्टर्स ने जब गहरी पड़ताल की तो हजारों हुक वर्म लीवर से चिपककर खून चूसते और नाचते हुए दिखे। जो हूक वर्म जो खून नहीं चूस रहे थे वो बिल्कुल सफेद थे और लीवर की सतह में बैठे हुए थे। इसके बाद मरीज का ट्रीटमेंट शुरू किया गया और चार हफ्ते में ही मरीज की सेहत में सुधार हो गया।

डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि जब से वो प्रेक्टिस कर रहे हैं तब से ये उनके सामने पहला मामला है कि पेट के कीड़े किसी बच्चे का 22 लीटर खून पी गए हों।

अब ये भी जान लीजिए कि क्या होते हैं हुक वर्म और इनके जरिये बीमारी कैसे पनपती है...

- हूक वर्म भूरे रंग केपैरासाइट्स होते हैं
- गंदे खाने, पीने के पानी या पैरों में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं
- मिट्टी या घास पर नंगे पैर चलने पर भी हुकवर्म के लार्वा शरीर में पहुंच जाते हैं
- हुक वर्म खून पीकर जिंदा रहते हैं

हमारी पड़ताल में बच्चे का 22 लीटर खून पीने वाले कीड़े का वायरल वीडियो बिल्कुल सच साबित हुआ।

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